रिपोर्ट – परवेज आलम
सावित्रीबाई फुले के सपनो को साकार करने का लिया संकल्प
जसरा प्रयागराज। लोग सावित्रीबाई फुले पर कीचड़ और पत्थर फेंकते रहे और सावित्रीबाई फुले भारत की बेटियों को शिक्षित करती गई। भारत देश की प्रथम महिला शिक्षिका, सामाजिक क्रान्ति की अग्रदूत, नारीमुक्ति आंदोलन की जननी, दलितों, पिछड़ों महिलाओ के लिए पहला स्कूल खोलने वाली भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका, जातिवाद, अशिक्षा, अज्ञान के खिलाफ आजीवन संघर्ष करने वाली क्रांतिज्योति माता सावित्री बाईं फुले की जयंती पर प्रबुद्ध फाउंडेशन और डा. अम्बेडकर वेलफेयर एसोसिएशन (दावा) के संयुक्त तत्वावधान में यमुनापार की तहासील बारा के विकास खण्ड जसरा स्थित जसरा गांव में सात से सत्रह आयु वर्ग के बच्चों के सृजनात्मक, कलात्मक और व्यक्तित्व विकास के लिये आयोजित प्रस्तुतिपरक शीतकालीन प्रबुद्ध बाल रंग कार्यशाला के प्रतिभागी दो दर्जन से अधिक बच्चों ने सावित्रीबाई फुले को याद किया तथा उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।
कार्यशाला के संयोजक रंगकर्मी रंगनिर्देशक आईपी रामबृज ने विस्तार से सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्षों पर चर्चा किया। कार्यशाला के प्रतिभागी दो दर्जन से अधिक बच्चो में से दस बच्चियां जो कक्षा नौ व दस की छात्राएं है अपने जीवन मे सावित्रीबाई फुले के अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया।
शिवानी, साक्षी, मोनिका,आराध्या, सोनम, सुनेहा, खुशी, मानशी, सुहानी, लक्ष्मी, सपना, सीमा,आकांक्षा, तनु, नेहा, स्नेहा, निशा, शैल कुमारी, विष्णु, हर्ष आदि उपस्थित रहे।
