आजमगढ़ में S.I.R विशेष पुनरीक्षण पर सियासी घमासान, सपा ने लगाया भाजपा पर मतदाता सूची से नाम कटवाने की साजिश का आरोप
आजमगढ़ जिले में चल रहे S.I.R (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया है। समाजवादी पार्टी ने भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे बी.एल.ओ. (बूथ लेवल ऑफिसर) से जबरन फॉर्म-7 पर दस्तखत कराकर जिंदा और मौजूद मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने का प्रयास कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मिलकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने किया। उनके साथ विधायक नफीस अहमद, विधायक अखिलेश यादव, विधायक पूजा सरोज, जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव तथा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव अजीत कुमार राव शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पूरे मामले को रखा।
हवलदार यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं द्वारा टाइपशुदा फॉर्म-7 बड़ी संख्या में—कहीं 50 तो कहीं 100 की गिनती में—बी.एल.ओ. को सौंपे जा रहे हैं और उनसे जबरन आवेदन स्वीकार कराए जा रहे हैं। जो अधिकारी इन फॉर्मों को लेने से मना कर रहे हैं, उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है, यहां तक कि कुछ मामलों में एस.डी.एम. से फोन कराकर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे चुनावी नियमों का खुला उल्लंघन बताया।
सपा नेताओं का कहना है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नए और वास्तविक मतदाताओं के नाम शामिल होने से भाजपा घबराई हुई है। इसी वजह से प्रशासन और चुनाव आयोग की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से वोट कटवाने की कोशिश की जा रही है। समाजवादी पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की तो पार्टी बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी।
प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि लोकतंत्र की जड़ों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मतदाता सूची के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को सपा सड़कों पर उतरकर रोकेगी। वहीं जिलाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और नियम विरुद्ध कार्य करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल आजमगढ़ में S.I.R अभियान को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक ओर समाजवादी पार्टी इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश बता रही है, तो दूसरी ओर प्रशासन जांच का भरोसा दिला रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जिले की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।
