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पूना पैक्ट को लोगों ने धिक्कार दिवस के रूप में मनाया

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रिपोर्ट – परवेज आलम 

करछना प्रयागराज। पूर्वांचल दलित अधिकार मंच (पदम) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज की अध्यक्षता में यमुनापार की करछ विधानसभा स्थित बहुजन बाहुल्य बस्ती फत्तेपुर में पूना करार दिवस की 91 वीं वर्षगांठ धिक्कार दिवस के रूप में मनाया गया।
पदम संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने बताया कि देश के अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को ज्ञात होना चाहिये कि 07 अगस्त 1990 को जब मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करने की घोषणा हुई थी तब जन्मजात दलित-पिछड़ा आरक्षण विरोधी तत्कालीन और निवर्तमान बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस लेकर पिछड़ों के आरक्षण के खिलाफ आज 25 सितम्बर के ही दिन सोमनाथ के मंदिर से कमण्डल रथ निकाला था, पिछड़ा वर्ग विरोधी रथ पर लालकृष्ण आडवाणी, पी एम नरेंद्र मोदी और स्वर्गीय प्रमोद महाजन बैठे थे। 25 सितम्बर 1990 से ओबीसी द्वारा बीजेपी के लिए धिक्कार दिवस मनाया जाता है। पूरे देश का ओबीसी बीजेपी को आज धिक्कार रहा है। यद्यपि आप सभी युवा साथियों को जानकारी होगी लेकिन यह कहना चाहूंगा कि संविधान लिखते समय परम पूज्य बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर जी ने सर्व समाज के लोगों के मान सम्मान स्वाभिमान के लिए समतामूलक कानून बनाया, साथ ही साथ हजारों साल से वर्ण व्यवस्था में बांटकर जाति के आधार पर ऊंच-नीच बनाकर अधिकार वंचित किए गए बहुजन समाज को शासन प्रशासन में भागीदारी देने के लिए विशेष प्रावधान किए जिसे आज आरक्षण कहा जाता है। जबकि हकीकत में आरक्षण नहीं प्रतिनिधित्व है। ओबीसी के युवाओं को परम पूज्य बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए क्योंकि संविधान में सबसे पहले बाबा साहब ने ओबीसी के लिए अनुच्छेद 340 लिखा जिसके आधार पर आज 27 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिल रहा है। अनुच्छेद 341 अनुसूचित जाति के लिए और अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजाति के लिए बाद में लिखा गया। जानकर हैरानी होगी कि सनातन धर्म की वर्ण व्यवस्था में बांटे गए चौथे वर्ण शूद्र को 6743 जातियों में बांट दिया गया था जिनमे से 3743 जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग और 3000 जातियों को एससी, एसटी में बांटा गया, जिससे आने वाले दिनों में कभी एक ना हो पाए, परम पूज्य बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर को मालूम था कि एससी, एसटी, ओबीसी एक ही हैं इसलिए बाबा साहब ने 3743 जातियों को ओबीसी बनाकर एक बना दिया तथा 3000 जातियों में बटे एससी, एसटी को एक प्रमाण पत्र देकर एक कर दिया।
डा. अम्बेडकर ने भारत के प्रत्येक नागरिक को एक वोट देने का अधिकार दिया। बाबा साहब डा. अम्बेडकर ने संविधान में जहां पर वंचित समाज एससी, एसटी, ओबीसी को अनेको अधिकार दिये है तो वहीं पर उन्होंने शोषण करने वालों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार भी दिए हैं और वह हथियार वोट रूपी हथियार है। बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा कि मैंने एक वोट का अधिकार देकर तुमको शासक बनने का अधिकार दे दिया है, अपनी एक पार्टी बनाकर आप लोग एकमत से एक जगह बैठकर शासक बन जाओगे और फिर आपके समाज का शोषण बंद हो जाएगा। ओबीसी युवाओ को जानकारी होनी चाहिये कि  प्रथम कानून मंत्री के रूप में बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से अनुच्छेद 340 के तहत पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने की बात की लेकिन लंबे समय से आश्वासन देने के बावजूद नेहरू सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं किया और ना ही महिलाओं को बराबरी का हक देने के लिए हिंदू कोड बिल पास किया जिस से दुःखी होकर बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर ने 27 सितंबर 1952 को ही कानून मंत्री से इस्तीफा दे दिया और उसी समय कहा कि हां मैं खुद अपनी एक पार्टी बनाकर सत्ताधारी बनना होगा, सत्ता पर कब्जा करके ही संविधान का पूरा लाभ हजारों साल से वंचित किए गए एससी एसटी ओबीसी को मिल सकता है। सामाजिक परिवर्तन के महानायक साहब कांशी राम ने बामसेफ डी एस-4 बनाने के बाद जब 14 अप्रैल 1984 को बाबा साहब के कथनानुसार बहुजन समाज पार्टी बनाई तो उसी दिन से ही दिल्ली में मण्डल आयोग लागू करने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया। बहुजन समाज पार्टी महात्मा ज्योतिबा राव फूले, छत्रपति शाहूजी कुर्मी राजा, प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख, पेरियार रामास्वामी नायकर, नारायणा गुरु, बाबा साहब डॉक्टर अम्बेडकर की चाहत को पूरा करने के लिए साहब कांशीराम ने इसे मिशन के रूप में लिया और अपने जिंदा रहे देश के सबसे बड़े सूबा उत्तर प्रदेश में बसपा के नेतृत्व में चार बार सरकार बनाई।
धिक्कार दिवस में सत्य प्रकाश, प्रकाश कुमार, संजय कुमार, जीतलाल, शिवकांत, बुद्धराम विमल, मोहिनी, सपना, सविता, शिव कुमारी, लक्ष्मी, हीरावती, चमेला, विमला, सरोजा आदि के साथ सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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