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मकर संक्रांति के दिन ही भीष्म पितामह ने क्यों त्याग था देह ?

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हिंदू धर्म में मकर संक्रांति काफी महत्व है. इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं …मान्यता है कि इसी दिन से वसंत ऋतु की भी शुरुआत होती है….वैसे मकर संक्रांति का महाभारत से भी गहरा संबंध है. भीष्म पितामह 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहे, लेकिन अपना शरीर नहीं त्यागा क्योंकि वे चाहते थे …कि जिस दिन सूर्य उत्तरायण होगा तभी वे अपने प्राणों का त्याग करेंगे. …मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाई जाएगी….ज्योतिष के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन बहुत खास होता है. ….सूर्य को सभी राशियों का राजा माना जाता है ….मकर संक्रांति के दिन सूर्य के गोचर से जहां खरमास खत्म हो जाएगा, वहीं वसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत मिलता है ….मकर संक्रांति का अद्भुत जुड़ाव महाभारत काल से भी है. … 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहने के बाद भीष्म पितामह ने अपने प्राणों का त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था ….18 दिन तक चले महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने 10 दिन तक कौरवों की ओर से युद्ध लड़ा …रणभूमि में पितामह के युद्ध कौशल से पांडव व्याकुल थे बाद में पांडवों ने शिखंडी की मदद से भीष्म को धनुष छोड़ने पर मजबूर किया और फिर अर्जुन ने एक के बाद एक कई बाण मारकर उन्हें धरती पर गिरा दिया. चूंकि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. इसलिए अर्जुन के बाणों से बुरी तरह चोट खाने के बावजूद वे जीवित रहे. …भीष्म पितामह ने ये प्रण ले रखा था कि जब तक हस्तिनापुर सभी ओर से सुरक्षित नहीं हो जाता, वे प्राण नहीं देंगे. साथ ही पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए…सूर्य के उत्तारायण होने का भी इंतेजार किया, क्योंकि इस दिन प्राण त्यागने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है…मकर संक्रांति का पुण्यकाल मुहूर्त सूर्य के संक्रांति समय से 16 घटी पहले और 16 घटी बाद का पुण्यकाल होता है. … इस बार पुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शुरू हो जाएगा, जो शाम को 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा ….इसमें स्नान, दान, जाप कर सकते हैं. वहीं स्थिर लग्न यानि समझें तो महापुण्य काल मुहूर्त 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. … इसके बाद दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक मुहूर्त रहेगा. …

खिचड़ी के बिना अधूरा माना जाता है मकर संक्रांति

सबसे पहले बात करते हैं खिचड़ी की। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाना भी बेहद महत्व की चीज है.. लेकिन अगर आप खिचड़ी दान करते हैं तो यह बहुत ही शुभ होता है। इस दिन दाल और चावल की खिचड़ी खाना और दान करना बेहद शुभ होता है… अगर आप खिचड़ी दान करना चाहते हैं तो काली उड़द की दाल के साथ चावल मिलाकर बनाइए और दान कीजिए…. अगर कच्ची खिचड़ी दान करना चाहते हैं तो उड़द की दाल, चावल, हल्दी नमक और देसी घी को अलग अलग बर्तन में रखकर दान कर सकते हैं…. चूंकि उड़द शनि का प्रतीक है, इसलिए इसके दान से शनि दोष दूर होगा और चावल चूंकि अक्षय अनाज कहा जाता है…. चावल दान करेंगे तो उसका सौ गुणा पुण्य प्राप्त होता है…

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