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आज़मगढ़ में फर्जी समिति बनाकर 50 लाख की सरकारी धन की हेराफेरी, जांच के आदेश

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आज़मगढ़ में फर्जी समिति बनाकर 50 लाख की सरकारी धन की हेराफेरी, जांच के आदेश

आज़मगढ़ जिले के बिलरियागंज विकासखंड स्थित ग्राम सभा बिंदवल में सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम सभा में नियमों को ताक पर रखकर फर्जी समिति का गठन कर 50 लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन किया गया। इस मामले में ग्राम सभा के सदस्यों ने शासन से शिकायत की, जिसके बाद मंडलायुक्त आज़मगढ़ को जांच के निर्देश दिए गए हैं।

शिकायत पर शासन ने दिए जांच के आदेश

ग्राम सभा बिंदवल के सदस्य अरविंद कुमार और अन्य सदस्यों ने प्रमुख सचिव पंचायती राज उत्तर प्रदेश से इस गड़बड़ी की शिकायत की थी। इसके बाद 28 जनवरी 2025 को प्रमुख सचिव ने मंडलायुक्त आज़मगढ़ को निर्देश दिया कि ग्राम प्रधान के खिलाफ लगे आरोपों की गहन जांच की जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

मंडलायुक्त विवेक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त विकास आयुक्त धर्मेंद्र प्रताप सिंह को जांच की जिम्मेदारी सौंपी और उनसे जांच आख्या प्रस्तुत करने को कहा।

संयुक्त विकास आयुक्त ने शुरू की जांच

संयुक्त विकास आयुक्त धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने इस प्रकरण की जांच प्रारंभ कर दी है। 17 फरवरी को उन्होंने शिकायतकर्ता सदस्यों को अपना बयान और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके क्रम में ग्राम सभा बिंदवल के सदस्य संयुक्त विकास आयुक्त के कार्यालय पहुंचे और अपने बयान दर्ज कराए।

ग्राम सभा के सदस्यों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और बिलरियागंज ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों ने मिलीभगत कर फर्जी तरीके से ग्राम समितियों का गठन किया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा के चुने गए सदस्यों को किसी भी प्रस्ताव की जानकारी नहीं दी गई और समितियों का गठन कागजों में कर सरकारी धन निकाला गया।

संयुक्त विकास आयुक्त का बयान

संयुक्त विकास आयुक्त धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर इस मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, “आज शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए गए हैं और साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

ग्राम सभा सदस्यों का आरोप

ग्राम सभा बिंदवल के सदस्य अरविंद कुमार ने कहा, “हमने ग्राम प्रधान और ब्लॉक के अधिकारियों की गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाई है। बिना किसी सूचना के समितियों का गठन दिखाकर लाखों रुपये की हेराफेरी की गई है। हम चाहते हैं कि दोषियों को कड़ी सजा मिले।”

आगे की कार्रवाई

संयुक्त विकास आयुक्त द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन द्वारा आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी ग्राम प्रधान और ब्लॉक कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है।

इस मामले ने पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि शासन इस मामले में कितना सख्त कदम उठाता है और क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होती है या नहीं।

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