Breaking News

“जिंदगी का सफर”

Spread the love

“जिंदगी का सफर” 


“चलती रही जिंदगी, रुकती नहीं,
कभी धूप, कभी छांव, पर झुकती नहीं।
कभी हंसाए, कभी रुलाए,
कभी उम्मीदों के दीप जलाए।”


जीवन निरंतर चलता रहता है, कभी रुकता नहीं। सुख और दुख जीवन के अभिन्न अंग हैं, लेकिन इनसे झुकने की बजाय हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए। यह हमें कभी खुशी देता है, कभी दुख, लेकिन उम्मीदों के दीप भी जलाता रहता है।


“राहों में कांटे भी आए बहुत,
गिरते-संभलते चलते गए।
कुछ अपने थे, कुछ पराए मिले,
हर हाल में हम बढ़ते गए।”


जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, रास्ते में कई बाधाएँ खड़ी होती हैं, लेकिन हमें गिरकर भी उठना और आगे बढ़ना होता है। सफर में कुछ अपने मिलते हैं तो कुछ पराए भी होते हैं, लेकिन हमें हर परिस्थिति में आगे बढ़ते रहना चाहिए।


“सपनों की गठरी थी कांधे पे,
अरमानों की सौगात लिए।
कुछ पूरे हुए, कुछ रह गए,
पर हौसलों को थामे रहे।”


हमारे कंधों पर सपनों का बोझ होता है और हम कई इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करते हैं। कुछ सपने पूरे होते हैं, कुछ अधूरे रह जाते हैं, लेकिन हमें अपने हौसले को बनाए रखना चाहिए।


“हर शाम के बाद नई भोर आई,
हर अंधेरे में किरण चमक आई।
जो बीत गया, वो यादें बनी,
जो सामने है, वो राह नई।”


हर कठिनाई के बाद एक नई शुरुआत होती है। अंधकार के बाद प्रकाश जरूर आता है। जो समय बीत गया, वह सिर्फ यादों का हिस्सा बन जाता है, लेकिन जो वर्तमान में है, वह हमारे लिए एक नई राह तैयार करता है।

“चलो मुस्कुराकर इसे जी लिया जाए,
जो मिला हमें, उसे अपना बनाया जाए।
क्यों डरें इन हवाओं से,
जब हमारे पंखों में उड़ान बाकी है!”


हमें जीवन को खुशी के साथ जीना चाहिए और जो भी हमारे पास है, उसे अपनाकर संतुष्ट रहना चाहिए। चुनौतियों से डरने की जरूरत नहीं, क्योंकि हमारे अंदर आगे बढ़ने और उड़ान भरने की क्षमता अभी भी बाकी है।

यह कविता जीवन के सफर को दर्शाती है, जिसमें संघर्ष, उम्मीदें, सपने, सफलताएँ और असफलताएँ शामिल हैं। यह हमें सिखाती है कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय आगे बढ़ते रहना चाहिए। हर मुश्किल के बाद एक नया सवेरा आता है, और जब तक हमारे अंदर हौसला है, हमें कभी रुकना नहीं चाहिए।

लेखक – राहुल मौर्या 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial