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आज मेरे प्यार की शादी है

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“आज मेरे प्यार की शादी है”


“आज मेरे प्यार की शादी है,
दिल में हल्की सी नाराज़गी है।
होंठ हँसने का खेल रचाए,
आँखों में थोड़ी नमी बाकी है।”


प्रेमी अपनी प्रेमिका की शादी में शामिल हो रहा है, लेकिन उसके मन में एक हल्की सी नाराज़गी और उदासी है। वह ज़ाहिर तो नहीं करता, मगर उसका दिल इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहा। उसके होंठ मुस्कान का दिखावा कर रहे हैं, मगर आँखों में अभी भी आंसू भरे हैं।


“जिसके सपनों से घर सजाया,
जिसे चाहा, जिसे अपनाया,
वो आज किसी और का होगा,
ये सोचकर दिल भर आया।”


प्रेमी उस व्यक्ति के बारे में सोच रहा है जिससे उसने अपने जीवन के सपने जोड़े थे, जिसे उसने अपने दिल में अपनाया था। मगर अब वह किसी और की होने जा रही है, और यह सोचकर उसका दिल भारी हो जाता है।


“महफ़िल सजी है, शहनाईयां हैं,
हँसी-मज़ाक की परछाइयाँ हैं।
पर मेरे दिल के एक कोने में,
बस ख़ामोशी की गहराइयाँ हैं।”


शादी का माहौल खुशी और उल्लास से भरा हुआ है, चारों ओर संगीत और हँसी-मज़ाक है। मगर कवि के दिल में अकेलापन और ख़ामोशी है। बाहरी दुनिया जश्न मना रही है, लेकिन उसके अंदर सिर्फ़ उदासी की गहराइयाँ हैं।


“चूड़ा खनके, महंदी महके,
वो गुलाबी जोड़ा चमके।
पर मेरे लिए तो सिर्फ़ रह गए,
कुछ अनकहे लफ़्ज़, कुछ धुंधले सपने।”


दुल्हन के हाथों में चूड़े की खनक और मेहंदी की खुशबू है, उसका गुलाबी जोड़ा उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा है। मगर कवि के पास सिर्फ़ अधूरे शब्द और टूटे सपने बच गए हैं, जिन्हें वह किसी से कह भी नहीं सकता।


“दुआ है मेरी, वो खुश रहे,
जिसे चाहा, उसे सुकून मिले।
मैं अपनी मोहब्बत को छोड़ चला,
बस यादों के कुछ फूल लिए।”


आखिरकार, प्रेमी अपने प्यार की ख़ुशी के लिए दुआ करता है। वह चाहता है कि जिसे उसने चाहा, उसे जीवनभर सुख और सुकून मिले। वह अपनी मोहब्बत को अलविदा कहता है, लेकिन उसकी यादों को अपने साथ रखता है।

इस कविता में एक व्यक्ति के दिल की बेचैनी और दर्द को व्यक्त किया गया है, जब वह अपने प्यार की शादी में शामिल हो रहा है। वह महसूस करता है कि उसकी प्रेमिका अब किसी और की हो गई है, और उसके दिल में हल्की सी नाराज़गी और खामोशी है। शादी के माहौल में शहनाई, हंसी-मज़ाक और सजावट सब कुछ होता है, लेकिन उसके अंदर बस कुछ अनकहे लफ़्ज़ और धुंधले सपने रह जाते हैं। अंत में, वह अपनी मोहब्बत की ख़ुशहाली की दुआ करता है, लेकिन खुद को उसकी यादों के साथ छोड़ कर आगे बढ़ता है।

लेखक – राहुल मौर्या

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