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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला का निधन …तिहाड़ जेल से ही 10वीं-12वीं की परीक्षा पास की..

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। शुक्रवार को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से हरियाणा की राजनीति में शोक की लहर है।

अंतिम यात्रा और श्रद्धांजलि

ओम प्रकाश चौटाला का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सिरसा के तेजा खेड़ा फार्म हाउस में शनिवार दोपहर 3 बजे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक सिरसा स्थित चौटाला गांव में रखा जाएगा। हरियाणा सरकार ने उनके सम्मान में 21 से 23 दिसंबर तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।

उनके निधन की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य, बड़े बेटे अजय चौटाला और पोते दुष्यंत चौटाला अस्पताल पहुंचे। उनके समर्थकों और प्रशंसकों ने मेदांता अस्पताल और उनके पैतृक गांव में शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पंजाब के पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री सुखबीर बादल समेत कई बड़े नेताओं ने चौटाला के निधन पर अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।

जीवन परिचय

ओम प्रकाश चौटाला का जन्म 1 जनवरी 1935 को हुआ था। वे हरियाणा के पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के पांच संतानों में सबसे बड़े थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। हालांकि, 2021 में तिहाड़ जेल में रहते हुए उन्होंने 86 वर्ष की आयु में 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। चौटाला ने पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

राजनीतिक सफर

शुरुआत और पहला चुनाव

चौटाला का राजनीतिक सफर 1968 में शुरू हुआ। उन्होंने अपने पिता देवीलाल की पारंपरिक सीट ऐलनाबाद से चुनाव लड़ा। हालांकि, वे विशाल हरियाणा पार्टी के उम्मीदवार लालचंद खोड़ से हार गए। हार के बावजूद, उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। एक साल बाद उपचुनाव में जनता दल के टिकट पर जीत हासिल कर विधायक बने।

मुख्यमंत्री बनने की राह

1987 के विधानसभा चुनावों में लोकदल ने 90 में से 60 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की। देवीलाल मुख्यमंत्री बने, लेकिन 1989 में केंद्र सरकार में उपप्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा। इसके बाद 2 दिसंबर 1989 को ओम प्रकाश चौटाला पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, महम कांड जैसी घटनाओं के कारण उन्हें पहली बार में सिर्फ साढ़े पांच महीने बाद ही इस्तीफा देना पड़ा।

पांच बार मुख्यमंत्री बनने का सफर

ओम प्रकाश चौटाला ने कुल पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके मुख्यमंत्री बनने की घटनाएं इस प्रकार हैं:

पहली बार (1989-1990)

मुख्यमंत्री बनने के छह महीने बाद महम कांड के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

दूसरी बार (1990)

दड़बा उपचुनाव में जीतने के बाद वे दोबारा मुख्यमंत्री बने, लेकिन पांच दिन बाद ही इस्तीफा देना पड़ा।

तीसरी बार (1991)

जनता दल के टूटने और चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री बनने के बाद चौटाला तीसरी बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन यह कार्यकाल केवल 15 दिनों का रहा।

चौथी बार (1999-2000)

1999 में बंसीलाल सरकार के गिरने के बाद चौटाला चौथी बार मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपने पिता देवीलाल द्वारा स्थापित इनेलो को मजबूत किया और सरकार बनाई।

पांचवीं बार (2000-2005)

2000 में चौटाला ने किसानों को मुफ्त बिजली का वादा कर पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद हासिल किया। हालांकि, बिजली बिल बढ़ने और किसानों के विरोध के कारण यह कार्यकाल विवादों में रहा। 2002 में जींद जिले के कंडेला गांव में किसानों पर पुलिस फायरिंग के बाद उनकी सरकार की छवि को गहरा आघात पहुंचा।

राजनीतिक गिरावट

2005 के विधानसभा चुनाव में इनेलो को केवल 9 सीटों पर सिमटना पड़ा। इसके बाद चौटाला और उनकी पार्टी ने कभी सत्ता का स्वाद नहीं चखा। 2018 में पार्टी टूट गई और 2019 में इनेलो को विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट पर जीत मिली। 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 2 सीटें मिलीं।

विवाद और जेल

ओम प्रकाश चौटाला का नाम 2000 के शिक्षक भर्ती घोटाले में सामने आया। इस मामले में उन्हें 2013 में 10 साल की सजा सुनाई गई। 2021 में स्वास्थ्य कारणों से तिहाड़ जेल से रिहा होने से पहले उन्होंने जेल में रहते हुए 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास की।

राजनीतिक धरोहर

चौटाला का जीवन हरियाणा की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उनके राजनीतिक करियर में विवाद, संघर्ष और उपलब्धियों का समावेश रहा। वे एक करिश्माई नेता थे, जिन्होंने हरियाणा की राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके निधन के साथ, हरियाणा ने एक अनुभवी नेता और राजनीतिक योद्धा को खो दिया है।

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