आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेन्द्र यादव ने केंद्र सरकार के तीन अहम बिलों—संविधान संशोधन बिल, परिसीमन बिल और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े प्रस्ताव—का जोरदार विरोध किया है। उन्होंने सदन में इन बिलों को संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि संसद को संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन आज ऐसे बिल लाए जा रहे हैं जो संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी इन तीनों ही बिलों का “पुरजोर विरोध” करती है।
संसद में बोलते हुए धर्मेन्द्र यादव ने खास तौर पर परिसीमन यानी डीलिमिटेशन के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि जनगणना से अलग करके परिसीमन करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनका आरोप था कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश कर रही है।
सांसद धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि “हम संसद में संविधान की रक्षा के लिए हैं, लेकिन ये बिल संविधान को तोड़ने-मरोड़ने का काम कर रहे हैं… समाजवादी पार्टी इसका विरोध करती है।”
इसके साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर भी सरकार को घेरा। धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि महिला बिल के नाम पर सिर्फ “चाशनी” चढ़ाई जा रही है, जबकि असल मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि जब तक पिछड़े वर्ग और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को इस बिल में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक समाजवादी पार्टी इसका समर्थन नहीं करेगी।
धर्मेन्द्र यादव ने यह भी दावा किया कि समाजवादी पार्टी महिलाओं के हितों की सबसे बड़ी पैरोकार है और उनकी पार्टी में महिलाओं की भागीदारी अन्य दलों से अधिक है।
अंत में उन्होंने सरकार से अपील की कि इन तीनों विवादित बिलों को वापस लिया जाए और 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को पूरी तरह लागू किया जाए।
अब देखना होगा कि संसद के अंदर इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव कितना बढ़ता है और क्या सरकार इन आपत्तियों पर कोई कदम उठाती है या नहीं… फिलहाल राजनीति गरम है और बहस तेज होती नजर आ रही है।
