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“सोशल मीडिया कार्रवाई पर सपा नेता इं. सुनील यादव ने उठाए सवाल, बोले—‘आवाज़ दबाना लोकतंत्र के लिए खतरा’”

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देश भर में चल रहे राजनीतिक माहौल के बीच सोशल मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आज़मगढ़ निवासी समाजवादी पार्टी के नेता इंजीनियर सुनील कुमार यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उनकी आवाज़ को दबाने के लिए उनका सोशल मीडिया पेज सस्पेंड कर दिया गया और फिर बिना सुनवाई के उसे डीएक्टिवेट कर दिया गया।

उन्होंने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया।

प्रेस वार्ता की शुरुआत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जिस तरह एक छात्र के लिए सवाल पूछना ज़रूरी होता है, उसी तरह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना विपक्ष का कर्तव्य है। अगर सरकार की किसी नीति में खामियाँ हैं और उससे कोई वर्ग प्रभावित हो रहा है, तो उस पर आवाज़ उठाना लोकतंत्र को मज़बूत करता है, न कि कमज़ोर।

सपा नेता इंजीनियर सुनील कुमार यादव ने बताया कि पिछले एक साल में उनके सोशल मीडिया पेज पर करीब 1 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुड़े थे। हाल ही में उन्होंने कुछ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर पोस्ट किए थे, जिसके बाद अचानक उनका पेज सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि 24 घंटे के भीतर बिना किसी ठोस कारण या सुनवाई के उनका अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि उनके पोस्ट में कहीं भी ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया गया था, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की पॉलिसी का उल्लंघन करती हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने सरकार की नीतियों, मीडिया की भूमिका और कुछ घटनाओं पर सवाल उठाए थे। साथ ही उन्होंने हिंसा के खिलाफ भी पोस्ट किया था, जिसमें लोगों से संवैधानिक तरीके अपनाने की अपील की गई थी।

उनका आरोप है कि संगठित तरीके से उनकी पोस्ट पर रिपोर्ट कराकर उनका अकाउंट बंद कराया गया। उन्होंने बिना नाम लिए इशारा किया कि यह किसी “आईटी सेल” की रणनीति हो सकती है, जिसे उनके विचारों से आपत्ति थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी विशेष संस्था या व्यक्ति पर सीधे तौर पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष की आवाज़ को भी समान रूप से जनता तक पहुँचाए। उनका कहना था कि यदि मीडिया एकतरफा हो जाएगी, तो लोकतंत्र कमज़ोर हो जाएगा।

उन्होंने साफ कहा कि वह अपनी आवाज़ उठाना बंद नहीं करेंगे, चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ।

वहीं, ओम प्रकाश राजभर को लेकर पूछे गए सवाल पर भी पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जो ख़ुद के समाज का सम्मान नहीं कर सकता उसके बारे में बात करना समय को व्यर्थ करना होगा l वे कभी भी कुछ भी बोलते हैं

इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निष्पक्षता और राजनीतिक दबाव को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित हो रही है, या फिर यह केवल नियमों के तहत की गई कार्रवाई है – इसका जवाब आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा।

इस प्रेस वार्ता के दौरान जिला अध्यक्ष हवलदार यादव और दलित नेता अजीत राव भी मौजूद थे l

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