Breaking News

सीरीज के बीच में अश्विन ने रोहित से क्यों पूछा कि अगर नहीं है ज़रुरत , तो ले लूँ संन्यास …

Spread the love

रविचंद्रन अश्विन के संन्यास को लेकर नहीं थम रहा विवाद
क्या भारतीय टीम में अश्विन के साथ हो रहा था सौतेला व्यवहार
क्यों सीरीज के बीच में अश्विन रोहित से पूछा कि अगर नहीं है ज़रुरत तो ले लूँ संन्यास …
भारतीय क्रिकेट में एक युग का समापन और संन्यास के कारणों पर जमकर बहस

भारतीय क्रिकेट के महान स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में भारतीय टीम के साथ अपने सफर को समाप्त करने का फैसला किया। उनका संन्यास, जिसने न केवल क्रिकेट जगत बल्कि उनके फैन्स और परिवार को भी चौंका दिया, कई सवालों और चर्चाओं का कारण बन गया है। अश्विन ने अपने करियर के आखिरी दौर में जिस तरह से संन्यास लिया, वह भारतीय क्रिकेट में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
इस लेख में हम रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के फैसले, उनके पिता के बयानों, और इस पूरे मामले पर मीडिया की प्रतिक्रिया पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही, हम यह भी समझेंगे कि अश्विन के संन्यास के पीछे क्या कारण हो सकते हैं और भारतीय क्रिकेट में उनकी भूमिका को लेकर क्या विचार हैं।
रविचंद्रन अश्विन, जो टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे सफल स्पिनर माने जाते हैं, उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा गाबा टेस्ट के बाद की थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने अपने करियर के इस अध्याय को समाप्त करने का फैसला लिया है। इस फैसले ने सभी को चौंका दिया, क्योंकि अश्विन ने भारतीय क्रिकेट में एक लंबा और शानदार करियर बिताया था।


अश्विन के संन्यास की घोषणा से पहले भारतीय क्रिकेट में उनकी स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कई रिकॉर्ड्स बनाए हैं और अपनी गेंदबाजी से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। लेकिन फिर भी, वह टीम इंडिया में नियमित रूप से खेलते हुए नजर नहीं आए थे, खासकर पिछले कुछ महीनों में। यही कारण हो सकता है कि अश्विन ने अपनी क्रिकेटिंग यात्रा को समाप्त करने का निर्णय लिया।
अश्विन के संन्यास के बाद, उनके पिता ने एक साक्षात्कार में इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें आखिरी समय में ही अपने बेटे के संन्यास के बारे में जानकारी मिली। रविचंद्रन ने कहा, “मुझे भी आखिरी मिनट में पता चला। मुझे नहीं पता था कि उनके दिमाग में क्या चल रहा था, लेकिन उन्होंने बस घोषणा कर दी। मैंने इसे पूरी खुशी के साथ स्वीकार किया।” हालांकि, उनके पिता ने यह भी कहा कि वे इस निर्णय से पूरी तरह खुश नहीं थे क्योंकि उनका मानना था कि अश्विन को खेलना जारी रखना चाहिए था।

अश्विन के पिता के बयान ने भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजमेंट को कटघरे में खड़ा कर दिया। उनका कहना था कि “शायद अपमान के कारण ही ऐसा हुआ होगा।” उन्होंने कहा कि लंबे समय तक शानदार रिकॉर्ड होने के बावजूद अश्विन को प्लेइंग इलेवन में नियमित जगह नहीं मिलना, एक प्रकार का अपमान हो सकता है। रविचंद्रन ने यह भी माना कि अश्विन ने खुद यह फैसला लिया होगा, क्योंकि वह लगातार अपमान का सामना कर रहे थे और शायद अब और इसे बर्दाश्त नहीं कर सके।
अश्विन के संन्यास पर मीडिया ने भी प्रतिक्रियाएं दीं। भारतीय क्रिकेट के कई विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों ने उनकी तारीफ की और उनके योगदान को सराहा। लेकिन कुछ लोगों ने इस निर्णय को लेकर सवाल भी उठाए, खासकर इस तथ्य को लेकर कि अश्विन को टीम में नियमित जगह नहीं मिल पा रही थी।
कई लोग मानते हैं कि अश्विन का संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा झटका है। उनका टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने का रिकॉर्ड उनकी महानता का प्रमाण है, और उनकी गेंदबाजी ने भारत को कई टेस्ट मैचों में जीत दिलाई है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना था कि अश्विन को टीम में और अधिक अवसर मिलने चाहिए थे, ताकि वह अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर सकें।

अश्विन के संन्यास के फैसले को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। उनके पिता के बयान से यह स्पष्ट होता है कि शायद अश्विन को टीम से नजरअंदाज करने का अनुभव उनके लिए एक कड़वा सच बन गया था। हालांकि, अश्विन ने इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए अपने पिता के बयान को खारिज किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उनके पिता को इस मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं थी और उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वह मीडिया प्रशिक्षित नहीं हैं और उनका बयान किसी विशेष उद्देश्य से नहीं था।

अश्विन का करियर भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है। उनकी गेंदबाजी ने भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 700 से अधिक विकेट चटकाए हैं और इस क्षेत्र में उनका योगदान अनमोल है। इसके अलावा, उन्होंने सीमित ओवर क्रिकेट में भी अपनी भूमिका निभाई है, हालांकि उनकी प्रमुख पहचान टेस्ट क्रिकेट से ही रही है।
अश्विन के संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट को एक बड़ी कमी महसूस होगी, क्योंकि उनका अनुभव और कड़ी मेहनत भारतीय क्रिकेट के लिए मूल्यवान थे। हालांकि, भारतीय क्रिकेट को उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा, और उनका नाम हमेशा भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial