नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के शीर्ष पद पर नितिन नबीन को नियुक्त कर एक बार फिर यह संदेश दिया है कि पार्टी में केवल चेहरा नहीं, बल्कि संगठनात्मक क्षमता, निष्ठा और संघर्ष का इतिहास भी मायने रखता है। बिहार की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाले नितिन नबीन का यह सफर आसान नहीं रहा। उनके जीवन की कहानी सादगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और अचानक आए संघर्षों से होकर गुजरती है।
नितिन नबीन ने 1996 में बिहार के प्रतिष्ठित सेंट माइकल स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे, जहां 1998 में उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी की। शुरुआती दौर में उनका झुकाव राजनीति से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की ओर था। वे एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य की तलाश में थे, लेकिन जीवन ने उनके लिए बिल्कुल अलग रास्ता तय कर रखा था।
नितिन नबीन के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनके पिता और तत्कालीन भाजपा विधायक नवीन किशोर सिन्हा का आकस्मिक निधन हो गया। इस घटना ने न सिर्फ परिवार को झकझोर दिया, बल्कि नितिन नबीन के भविष्य की दिशा भी बदल दी। पिता के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जीत दर्ज कर अपने सियासी सफर की शुरुआत की। इसके साथ ही उनकी औपचारिक शिक्षा 12वीं तक ही सीमित रह गई, लेकिन संगठन और राजनीति की पाठशाला में उन्होंने अनुभव से सीखते हुए खुद को मजबूत किया।
जातीय पृष्ठभूमि की बात करें तो नितिन नबीन कायस्थ समुदाय से आते हैं, जिसे बिहार की सामाजिक और राजनीतिक संरचना में बौद्धिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। बिहार की जातीय जनगणना के आंकड़ों के अनुसार इस समुदाय की आबादी लगभग 0.6 प्रतिशत है, लेकिन प्रशासन, शिक्षा और राजनीति में इसकी भूमिका हमेशा अहम रही है। भाजपा के रणनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि नितिन नबीन की नियुक्ति सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक मजबूती—दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
निजी जीवन में नितिन नबीन सादगी के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्नी दीपमाला श्रीवास्तव पहले एक बैंक में कार्यरत थीं, लेकिन अब उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी बेटी के नाम पर एक स्टार्टअप की शुरुआत की है। यह परिवार के आत्मनिर्भर और उद्यमशील सोच को दर्शाता है। नितिन नबीन की मां हमेशा चाहती थीं कि उनका बेटा राजनीति की अनिश्चितताओं से दूर रहकर एक सुरक्षित करियर बनाए, लेकिन परिस्थितियों और जिम्मेदारियों ने उन्हें जनसेवा के रास्ते पर ला खड़ा किया।
20 तारीख को औपचारिक रूप से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभालने जा रहे नितिन नबीन के सामने संगठन को 2027 और 2029 के बड़े चुनावी लक्ष्यों के लिए तैयार करने की चुनौती होगी। पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है, जो जमीन से जुड़े हैं, संगठन की नब्ज पहचानते हैं और बिना शोर-शराबे के काम करने में विश्वास रखते हैं। बिहार से दिल्ली तक का उनका यह सफर अब भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने जा रहा है।
