खबर आजमगढ़ जिले से है जहां आम आदमी पार्टी ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
प्रांत अध्यक्ष राजेश यादव ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हो रही हिंसा केवल उस देश का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय शांति से जुड़ा हुआ गंभीर अंतरराष्ट्रीय विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील हालात के बावजूद केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजेश यादव ने तीखे शब्दों में कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री से लेकर गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालय तक हिंदू नेतृत्व में हैं, तब पड़ोसी देश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी साधना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि कायरता है। उन्होंने कहा कि इस मौन से अत्याचार करने वालों का मनोबल और बढ़ रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से पार्टी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मांग की कि वे संविधान के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार को निर्देशित करें। पार्टी की प्रमुख मांगों में बांग्लादेश सरकार द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की ठोस गारंटी मिलने तक भारत-बांग्लादेश के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को निलंबित करना, भारत से बांग्लादेश को दी जा रही बिजली आपूर्ति पर रोक लगाना तथा अडानी समूह सहित किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट द्वारा की जा रही बिजली आपूर्ति पर प्रतिबंध शामिल है। इसके अलावा बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में दिए जा रहे संरक्षण के मुद्दे पर भी स्पष्ट और कठोर निर्णय लेने की मांग की गई।
प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाशंकर पाठक ने कहा कि बांग्लादेश में मंदिरों के ध्वंस, महिलाओं और बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार तथा भय के माहौल में हो रहे पलायन की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। वहीं जिलाध्यक्ष रविंद्र यादव ने चेतावनी दी कि यदि भारत सरकार ने समय रहते निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो इससे न केवल क्षेत्रीय शांति को खतरा होगा बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और नैतिक नेतृत्व पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे।
आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रपति से इस पूरे मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर केंद्र सरकार को ठोस और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देने की अपील की है
