वसंत पंचमी पर आज़मगढ़ में विविध स्थानों पर प्रकृति नमन कार्यक्रम, पर्यावरण संरक्षण का लिया गया सामूहिक संकल्प
आज़मगढ़। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर आज़मगढ़ जनपद के विभिन्न स्थानों पर प्रकृति नमन कार्यक्रम श्रद्धा, संकल्प और व्यापक जनभागीदारी के साथ संपन्न हुआ। देश के अनेक हिस्सों में आयोजित इस कार्यक्रम की श्रृंखला के अंतर्गत आज़मगढ़ में भी प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उसके संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने का संदेश दिया गया।
यह आयोजन नेचर नेटवर्क एवं लोक दायित्व के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जनपद के भीलमपुर गांव, बाबा शुभकरन जूनियर हाई स्कूल (महराजगंज), न्यू लोटस स्कूल (बिलरियागंज), उज्ज्वल मॉडल स्कूल (कप्तानगंज) सहित कई अन्य शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित हुए। इन आयोजनों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की शुरुआत माता सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात जल, वृक्ष, धरती और समस्त जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान भाव प्रकट किया गया। उपस्थित लोगों ने प्रकृति द्वारा मानव जीवन को दिए गए निःशुल्क उपहारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस दौरान जल-संवर्धन, अधिकाधिक वृक्षारोपण, स्वच्छता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
आज़मगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के संयोजक अलंकार कौशिक रहे। उनके मार्गदर्शन में सभी कार्यक्रम अनुशासित और सार्थक ढंग से संपन्न हुए। वहीं उत्तर प्रदेश के संयोजक डॉ. पवन कुमार ने कहा कि प्रकृति नमन कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रकृति मानव को जीवन, जल, वायु और अन्न प्रदान करती है, ऐसे में उसका संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे जल संकट, वनों की कटाई, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समाज ने प्रकृति के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसी क्रम में विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों द्वारा घोष-वाक्य, संकल्प पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। गीत, नाटक और विचार प्रस्तुतियों के जरिए यह बताया गया कि प्रकृति की रक्षा से ही मानव जीवन सुरक्षित रह सकता है। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और भावी पीढ़ी प्रकृति के संरक्षण को अपना दायित्व समझेगी।
