आजमगढ़ जनपद के महिला उद्योग शिल्प कला केन्द्र, 64 सदावर्ती चौक परिसर में 16वां राष्ट्रीय मतदान दिवस उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर केन्द्र के समस्त कर्मचारियों ने शत-प्रतिशत मतदान करने का संकल्प लिया और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की शपथ ली। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को मतदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रबंध समिति के मंत्री मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मतदान करना केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि हम सभी जागरूक होकर सही दिशा में मतदान करें, तो निश्चित रूप से देश मजबूत नेतृत्व की ओर बढ़ेगा और भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना साकार होगा। उन्होंने सभी से अपील की कि किसी भी परिस्थिति में अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें और लोकतंत्र को सशक्त बनाएं।
मनोज कुमार श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि मतदान से ही देश की एकता और अखंडता को मजबूती मिलती है। जब हर नागरिक अपने कर्तव्य को समझकर मतदान करता है, तब एक जिम्मेदार और सशक्त सरकार का निर्माण होता है, जो समाज के हर वर्ग के विकास के लिए कार्य करती है।
इस अवसर पर महिला उद्योग शिल्प कला केन्द्र के सदस्यों में राकेश कुमार श्रीवास्तव और ऋतिक राज उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यालय की पूर्व प्रधानाचार्या मंजू श्रीवास्तव एवं वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चंद्र श्रीवास्तव की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं ने लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मतदान को राष्ट्र निर्माण की नींव बताया।
कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों और उपस्थित आमजन ने लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान करने की शपथ ली। पूरे वातावरण में देशभक्ति और जागरूकता का भाव देखने को मिला। लोगों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं मतदान करेंगे, बल्कि अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करेंगे।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय मतदान दिवस के महत्व को समझते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन लोकतंत्र की मजबूती और देश की प्रगति की कामना के साथ किया गया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब हर नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करेगा, तभी सशक्त भारत का निर्माण संभव है।
