वाराणसी। अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति टूटने की सूचना के बाद सोमवार को काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलते ही पाल समाज के सैकड़ों लोग घाट पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और घाट पर हुई कथित तोड़फोड़ की जांच की मांग की। उनका कहना था कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल पर किसी भी प्रकार की क्षति न केवल समाज विशेष बल्कि पूरे देश और प्रदेश का अपमान है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि, इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई। आरोप है कि इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों की वर्दी तक फाड़ दी। हालात बिगड़ते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और भीड़ को वहां से खदेड़ा गया।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 18 लोगों को हिरासत में लिया। इन सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें थाने में बैठाया गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, पाल समाज के लोगों ने दावा किया कि वे केवल सच्चाई जानने घाट पहुंचे थे और किसी तरह की हिंसा उनका उद्देश्य नहीं था।
इधर, मणिकर्णिका घाट को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल की गई कथित तोड़फोड़ की तस्वीरों और पोस्ट को प्रशासन ने भ्रामक बताया है। इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, कांग्रेस नेता पप्पू यादव सहित अन्य लोग शामिल हैं। सभी आरोपियों को 72 घंटे के भीतर थाने में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय समय में उपस्थित न होने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जा सकती है।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर को नहीं तोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि घाट पर केवल जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। सोशल मीडिया पर जिस मंदिर की तस्वीरें वायरल की गईं, वह पूरी तरह सुरक्षित है और काशी विश्वनाथ धाम परिसर के भीतर स्थित है।
सोमवार को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और काशी विश्वनाथ धाम के एडीएम शंभू शरण ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मंदिर की वास्तविक तस्वीरें लेकर वायरल पोस्ट से उनका मिलान किया, जिसमें दावे पूरी तरह भ्रामक पाए गए। कुंभा महादेव मंदिर की तस्वीर को खंडित बताकर फैलाए गए दुष्प्रचार की भी पुष्टि नहीं हुई।
प्रशासन ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने और माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस की टीमें लगातार सोशल मीडिया पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक सूचना समय रहते रोकी जा सके और काशी की शांति व सौहार्द कायम रखा जा सके।
