आजमगढ़। लोकसभा में रेल बजट पर चर्चा के दौरान आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सरकार घोषणाओं और भाषणों में तो बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जब वास्तविक योजनाओं और बजट की बात आती है तो उत्तर प्रदेश को निराशा ही हाथ लगती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं उत्तर प्रदेश से तीसरी बार चुनकर संसद पहुंचे हैं, लेकिन इसके बावजूद रेल बजट में प्रदेश की अनदेखी साफ दिखाई दे रही है।
धर्मेंद्र यादव ने सभापति के माध्यम से रेल मंत्रालय से सवाल किया कि आखिर उत्तर प्रदेश के लिए सरकार ने ठोस रूप से क्या किया है। उन्होंने कहा कि कुछ परियोजनाएं जरूर आईं, लेकिन वे केवल वाराणसी तक सीमित रहीं, जबकि बाकी प्रदेश को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश से जुड़े कई मंत्री सरकार में बैठे हैं, लेकिन सत्ता में जाने के बाद उन्होंने प्रदेश की आवाज उठाना ही बंद कर दिया है।
सांसद ने रेलवे की एक बड़ी समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देशभर में रेलवे के मानवरहित फाटकों को खत्म करने के लिए जो अंडरपास बनाए गए हैं, वे बरसात के मौसम में पूरी तरह बेकार हो जाते हैं। दो से तीन महीने तक उनमें पानी भर जाता है, जिससे न तो बच्चे निकल पाते हैं, न बीमार और न ही किसान अपने सामान के साथ गुजर सकते हैं। उन्होंने रेल मंत्री से मांग की कि ऐसी जगहों पर अंडरपास की जगह फ्लाईओवर बनाए जाएं, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
धर्मेंद्र यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से जुड़ी कई लंबित परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वाराणसी से आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर तक नई रेल लाइन की घोषणा पहले ही हो चुकी है, लेकिन आज तक उस पर कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ। उन्होंने आजमगढ़ से मुंबई और दिल्ली के लिए सुपरफास्ट ट्रेन चलाने की मांग भी दोहराई और कहा कि लाखों लोग रोजगार के लिए मुंबई जैसे शहरों में जाते हैं, इसलिए बेहतर रेल सुविधा बेहद जरूरी है।
इसके अलावा उन्होंने इलाहाबाद से जौनपुर तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को आजमगढ़ तक बढ़ाने, मऊ-आजमगढ़-लखनऊ इंटरसिटी ट्रेन चलाने और मऊ-आजमगढ़ होते हुए माता वैष्णो देवी कटरा तक साप्ताहिक ट्रेन शुरू करने की भी मांग रखी। उन्होंने यह भी कहा कि कई ट्रेनों की घोषणा और नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद उनका संचालन अब तक शुरू नहीं हुआ है।
अपने संबोधन के अंत में धर्मेंद्र यादव ने कहा कि रेल मंत्री अक्सर मधुर व्यवहार के साथ आश्वासन तो देते हैं, लेकिन उन आश्वासनों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अगर वादे पूरे नहीं हो सकते तो साफ मना कर दिया जाए, लेकिन बार-बार आश्वासन देकर जनता को निराश न किया जाए।
