उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ से सांसद धर्मेन्द्र यादव ने संसद में जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछड़े वर्ग के साथ एक बार फिर अन्याय की आशंका गहराती जा रही है।
संसद में बोलते हुए सांसद धर्मेन्द्र यादव ने अपने वक्तव्य की शुरुआत देश के महान नेताओं—डॉ. राम मनोहर लोहिया, सरदार भगत सिंह और राजगुरु को श्रद्धांजलि देकर की। इसके बाद उन्होंने सीधे मुद्दे पर आते हुए जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार को घेरा।
धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार की कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का फैसला लिया था, जिसका देशभर में स्वागत हुआ। उस वक्त ऐसा लगा कि शायद पहली बार भारतीय जनता पार्टी भी पिछड़े वर्ग के मुद्दों पर गंभीरता से सोच रही है।
लेकिन सांसद ने आरोप लगाया कि 22 जनवरी 2026 को जारी गजट नोटिफिकेशन में पिछड़े वर्ग का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि इस जनगणना के लिए करीब 33 सवाल तय किए गए हैं, लेकिन उनमें कहीं भी ओबीसी या पिछड़े वर्ग को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखता।
“हम लोग बड़ा चश्मा लगाकर ढूंढ रहे थे कि शायद गजट में पिछड़ों का जिक्र हो, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं मिला। सरकार की बात और नियत में फर्क साफ दिखाई दे रहा है।”
धर्मेन्द्र यादव ने 2011 की जाति जनगणना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी पिछड़े वर्ग के साथ धोखा हुआ था। यही कारण है कि आज भी देश का पिछड़ा वर्ग सरकार की नीतियों को लेकर आशंकित और भयभीत है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि अगर उसकी नीयत साफ है, तो मौजूदा गजट में संशोधन कर पिछड़े वर्ग को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का नाम लेते हुए कहा कि जो नेता लगातार पिछड़ों की बात करते हैं, उन्हें भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
अब सवाल यही है कि क्या सरकार इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देगी और गजट में संशोधन करेगी, या फिर जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक संग्राम और तेज होगा। फिलहाल, इस बयान के बाद सियासी पारा चढ़ना तय माना जा रहा है।
