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आजमगढ़ में ईद पर भाईचारे की मिसाल, शिक्षा के अग्रदूत अयाज़ खान के घर पहुंचे भाजपा नेता डॉ. संतोष सिंह…

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आजमगढ़ में ईद पर भाईचारे की मिसाल, शिक्षा के अग्रदूत अयाज़ खान के घर पहुंचे भाजपा नेता डॉ. संतोष सिंह

एक तरफ शिक्षा का उजाला, दूसरी तरफ राजनीति का अनुभव—दोनों ने गले मिलकर दिया एकता का संदेश

रिपोर्ट | आजमगढ़

ईद-उल-फितर के मौके पर आजमगढ़ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने गंगा-जमुनी तहज़ीब को फिर से जीवंत कर दिया। जिले के प्रसिद्ध सीपीएस ग्रुप ऑफ स्कूल के फाउंडर और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले अयाज़ अहमद खान के आवास पर उस समय खास माहौल बन गया, जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद डॉ. संतोष सिंह ईद की मुबारकबाद देने पहुंचे।

यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि समाज के दो अलग-अलग क्षेत्रों—शिक्षा और राजनीति—का सुंदर संगम भी थी। एक ओर जहां अयाज़ अहमद खान शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं, वहीं डॉ. संतोष सिंह अपने राजनीतिक अनुभव से जनसेवा में सक्रिय हैं।

दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और खुशियां साझा कीं। यह नजारा वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद खास और प्रेरणादायक रहा।

डॉ. संतोष सिंह ने इस मौके पर कहा कि ईद का त्योहार हमें प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर हमें एक-दूसरे के करीब लाते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। “हम सभी को मिलकर देश की तरक्की और आपसी सौहार्द के लिए काम करना चाहिए।

वहीं, अयाज़ अहमद खान ने डॉ. संतोष सिंह का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा और समाज सेवा का मकसद भी यही है कि लोगों को जोड़ा जाए और उनमें भाईचारा बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि “त्योहार हमें यह सिखाते हैं कि हम अपने मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटें।”

इस अवसर पर कई स्थानीय लोग और गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की। सभी ने एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हुए देश में शांति, सौहार्द और विकास की कामना की।

आजमगढ़ की यह तस्वीर यह बताती है कि जब शिक्षा और नेतृत्व एक साथ खड़े होते हैं, तो समाज को एक नई दिशा मिलती है। यह मुलाकात इस बात का प्रतीक है कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोग भी एक साझा उद्देश्य—समाज की भलाई और एकता—के लिए साथ आ सकते हैं।

ईद के इस खास मौके पर यह संदेश साफ तौर पर उभरकर सामने आया कि असली ताकत न तो सिर्फ राजनीति में है और न ही केवल शिक्षा में, बल्कि इन दोनों के मिलन में है, जो समाज को आगे बढ़ाने का रास्ता दिखाता है।

 

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