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जयपुर में गैस टैंकर धमाका: 11 की मौत, 33 घायल, हाईवे बना आग का गोला…

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जयपुर में गैस टैंकर धमाका: 11 की मौत, 33 घायल, हाईवे बना आग का गोला

जयपुर, 20 दिसंबर:

राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। अजमेर हाईवे पर दिल्ली पब्लिक स्कूल के सामने एक एलपीजी गैस से भरे टैंकर में जोरदार धमाका हुआ। इस हादसे में 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 33 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे का कारण एक तेज रफ्तार ट्रक द्वारा टैंकर को टक्कर मारना बताया जा रहा है। टक्कर के बाद टैंकर से गैस का रिसाव होने लगा, जिसने कुछ ही समय में आग पकड़ ली और देखते ही देखते यह आग एक किलोमीटर के दायरे में फैल गई।

घटना का पूरा विवरण

हादसा सुबह लगभग 5:44 बजे हुआ, जब अजमेर से जयपुर की ओर आ रहा एक गैस टैंकर दिल्ली पब्लिक स्कूल के सामने यू-टर्न ले रहा था। इसी दौरान जयपुर से आ रहा एक तेज रफ्तार ट्रक टैंकर से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टैंकर से तुरंत गैस का रिसाव शुरू हो गया। इस रिसाव ने आग पकड़ ली, जो तेजी से फैलते हुए पूरे इलाके को आग के गोले में तब्दील कर दिया।

आग इतनी भयानक थी कि टैंकर के पीछे चल रही एक स्लीपर बस और हाईवे के किनारे स्थित पाइप फैक्ट्री भी चपेट में आ गई। फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला, और कई गाड़ियां आग की लपटों में घिर गईं। घटना के बाद हाईवे को बंद कर दिया गया, और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

हादसे का प्रभाव

  1. 11 लोगों की मौत: हादसे में 11 लोगों की जान चली गई। कई शव इतनी बुरी तरह से जल चुके थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।
  2. 33 घायल: 33 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
  3. 40 से अधिक गाड़ियां जलीं: आग की चपेट में 40 से ज्यादा वाहन आ गए, जिनमें कारें, ट्रक और एक स्लीपर बस शामिल हैं।
  4. पाइप फैक्ट्री भी जली: हादसे के पास स्थित एक पाइप फैक्ट्री पूरी तरह जलकर राख हो गई।

गेल इंडिया की प्रतिक्रिया

गेल इंडिया लिमिटेड के डीजीएम (फायर एंड सेफ्टी) सुशांत कुमार सिंह ने बताया कि घटनास्थल से 100 मीटर की दूरी पर गेल की एक क्रूड ऑयल पाइपलाइन गुजर रही थी। यदि आग पाइपलाइन तक पहुंच जाती, तो और भी बड़ा हादसा हो सकता था।

“टक्कर के बाद एलपीजी गैस ने लिक्विड रूप में रिसाव शुरू किया। जैसे ही गैस बाहर आई, उसने अपने आप आग पकड़ ली। टक्कर के कारण उत्पन्न स्पार्क से आग भड़की,” उन्होंने कहा।

रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की जानकारी मिलते ही 30 से ज्यादा एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग बुझाने और घायलों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। लेकिन गैस के फैलाव और आग की तीव्रता के कारण बचाव कार्य में भारी दिक्कतें आईं। आग बुझने के बाद शवों को पोटली में डालकर अस्पताल भेजा गया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई वरिष्ठ मंत्री घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने हादसे के कारणों की जानकारी ली और घायलों का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा दी जाए। साथ ही मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

चश्मदीदों की गवाही

हादसे के समय हाईवे पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को अपनी गाड़ियों से बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।

“मैंने अपनी आंखों के सामने कई गाड़ियों को आग में जलते देखा। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका,” एक चश्मदीद ने बताया।

सुरक्षा उपायों की कमी

इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर भारी वाहनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  1. गैस टैंकर का रिसाव: एलपीजी गैस के टैंकर में रिसाव से यह हादसा हुआ। ऐसे वाहनों की नियमित जांच क्यों नहीं होती?
  2. ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन: ट्रक तेज रफ्तार में था और गलत तरीके से टैंकर से टकरा गया।
  3. आपातकालीन सुविधाओं की कमी: हादसे के बाद मौके पर तुरंत फायर ब्रिगेड और बचाव टीम न पहुंच पाने से आग और भयानक हो गई।

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