रहमानखेड़ा में पहली बार बाघ की मौजूदगी दर्ज: ट्रैप कैमरे में कैद हुआ बाघ, वन विभाग की सक्रियता बढ़ी
लखनऊ के रहमानखेड़ा क्षेत्र में पहली बार बाघ की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह बाघ केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) के चौथे ब्लॉक में ट्रैप कैमरे में सुबह 5 बजे दिखाई दिया। इसके बाद वन विभाग ने पूरे इलाके में बाघ की घेराबंदी के लिए ऑपरेशन तेज कर दिया है।
ट्रैप कैमरे में कैद हुआ बाघ
डीएफओ डॉ. सितांशु पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह ट्रैप कैमरों की जांच की। चौथे ब्लॉक में लगे एक ट्रैप कैमरे में बाघ की तस्वीरें स्पष्ट रूप से कैद हुईं। यह पहली बार है जब इस क्षेत्र में ट्रैप कैमरे में बाघ की उपस्थिति दर्ज हुई है। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) की टीम भी मौके पर पहुंच गई है और स्थिति का आकलन कर रही है।
बाघ की गतिविधियां और संभावनाएं
डॉ. पांडेय ने बताया कि 12 दिसंबर को CISH में बाघ ने नीलगाय का शिकार किया था। इसके बाद से अब तक उसने कोई नया शिकार नहीं किया है। इससे बाघ के जल्द ही नया शिकार करने की संभावना बढ़ गई है। बाघ की संभावित छिपने की जगहों की तलाश में टीमें लगातार सतर्क हैं।
ऑपरेशन में विशेषज्ञों की मदद
वन विभाग ने शाहजहांपुर के पूर्व डीएफओ प्रखर गुप्ता को भी ऑपरेशन में शामिल किया है। डॉ. पांडेय ने बताया कि प्रखर गुप्ता टाइगर पकड़ने में विशेषज्ञ हैं और उनकी मदद से ऑपरेशन को गति दी जा रही है।
गांवों में कॉम्बिंग ऑपरेशन
CISH के आसपास के गांवों, जैसे मीठे नगर, उलरापुर, और दुगौली में वन विभाग की टीम ने कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया है। थर्मल ड्रोन और नाइट विजन कैमरों का उपयोग करके इलाके की गहन तलाशी ली जा रही है। बेहता नाला और अन्य संभावित क्षेत्रों में बाघ की गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
बाघ की उपस्थिति ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। गुरुवार रात को दुगौली गांव निवासी लाखन ने बाघ को देखा। लाखन ने बताया कि उसने बाघ को करीब 50 मीटर की दूरी से देखा और तुरंत वन विभाग को सूचित किया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघ के पगमार्क की पुष्टि की।
बाघ पकड़ने के लिए प्रयास
वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए 15 ट्रैप कैमरे और 2 कैचिंग केज लगाए हैं। शुक्रवार को कैचिंग केज की लोकेशन बदल दी गई और उसमें बकरी की जगह भैंस का बच्चा बांधा गया। विभाग का मानना है कि इससे बाघ को केज में आने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
सुरक्षा को लेकर चिंता
एसडीओ हरिलाल ने डीएफओ डॉ. पांडेय से सुरक्षा उपकरणों की कमी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि टीम के पास कोई हथियार नहीं है, जिससे इमरजेंसी में खतरा बढ़ सकता है। इस पर डीएफओ ने जल्द ही दो असलहे देने का आश्वासन दिया।
बाघ के डर से बदला जानवरों का व्यवहार
ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के डर से सियार और अन्य जंगली जानवर गांवों की तरफ आने लगे हैं। उलरापुर गांव के निवासी गजराज ने बताया कि बुधवार रात करीब 9:30 बजे कुत्तों और सियारों का झुंड झोपड़ी के पास आ गया था। जब उन्होंने टॉर्च जलाकर देखा, तो बाघ बेहता नाले की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया।
पर्चों और पटाखों का सहारा
बाघ को गांवों से दूर रखने के लिए वन विभाग ने पर्चे बांटे हैं, जिनमें बाघ से बचने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, ग्रामीणों को सुतली बम और बुलेट बम बांटे गए हैं। विभाग ने सुबह-शाम पटाखे जलाने की सलाह दी है ताकि बाघ गांवों के करीब न आए।
विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के सिमटने और शहरीकरण के कारण वन्यजीव मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं। यह बाघ भी पास के जंगल से भटककर रहमानखेड़ा और उसके आसपास के इलाकों में पहुंचा है।
