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सुदामा चरित्र सुनकर भावुक हुए श्रोता

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खागा/फतेहपुर। विजयनगर मुहल्ले में चल रही भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन श्री भागवत कथा का रसपान करने के लिए भक्त उपस्थित हुए। इलाहाबाद से पधारे आचार्य हेमंत शरण मिश्र ने भागवत कथा के अंतिम दिन कई प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। इसमें नृग चरित्र वासुदेव नारद संवाद, सुदामा प्रसंग व परीक्षित मोक्ष की कथा का बड़े ही रोचक अंदाज में वर्णन किया।
कथा के दौरान आचार्य ने श्रोताओं को भागवत को अपने जीवन में उतारने की अपील की। साथ ही सुदामा चरित के माध्यम से श्रोताओं को श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल पेश की। समाज को समानता का संदेश दिया। इस कड़ी में आचार्य ने बताया श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है, वहीं इस कथा को कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। अंतिम दिन सुखदेव द्वारा राजा परीक्षित को सुनाई गई श्रीमद् भागवत कथा का पूर्णता प्रदान करते हुए विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने सात दिन की कथा का सारांश बताते हुए कहा कि जीवन कई योनियों के बाद मिलता है, और इसे कैसे जीना चाहिए इसके बारे में भी उपस्थित भक्तों को समझाया। सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाते हुए श्री कृष्ण सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि जैसे बिना याचना के कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा। अंत में कृष्ण के दिव्य लोक पहुंचने का वर्णन किया। महाआरती के बाद भोग वितरण किया गया। इस अवसर पर अखिलेश तिवारी, कमल देव मिश्र, माला शुक्ला, सुनील शुक्ल, भोला यादव, श्रवण मिश्रा, गुड़िया मिश्रा, चंद्रकांत मिश्र उपस्थित रहे।

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