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ममता कुलकर्णी: महामंडलेश्वर बनने, इस्तीफा देने और पुनः पद ग्रहण करने की पूरी कहानी

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ममता कुलकर्णी: महामंडलेश्वर बनने, इस्तीफा देने और पुनः पद ग्रहण करने की पूरी कहानी

प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री से साध्वी बनीं ममता कुलकर्णी ने हाल ही में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पदवी को लेकर काफी सुर्खियां बटोरीं। 24 जनवरी को प्रयागराज महाकुंभ में महामंडलेश्वर की उपाधि ग्रहण करने के बाद उन्होंने अचानक 10 फरवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन, मात्र दो दिन बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लेते हुए पुनः महामंडलेश्वर का पद ग्रहण कर लिया। इस घटनाक्रम ने सनातन धर्म, किन्नर अखाड़े और संत समाज में नई बहस को जन्म दिया। आइए, इस पूरे मामले को सिलसिलेवार समझते हैं।

महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया

ममता कुलकर्णी, जो करीब 25 वर्षों से सन्यास जीवन बिता रही हैं, 23 जनवरी 2024 को प्रयागराज महाकुंभ पहुंचीं। वे भगवा वस्त्रों में लिपटी थीं और उनके गले में रुद्राक्ष की बड़ी मालाएं थीं। उन्होंने किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से मुलाकात की, जिसके बाद उनके महामंडलेश्वर बनने की प्रक्रिया शुरू हुई।

महामंडलेश्वर बनने से पहले पिंडदान और संगम स्नान किया जाता है। इसके अलावा, उम्मीदवार की तपस्या, साधना और ज्ञान की परीक्षा ली जाती है। ममता ने इन सभी परीक्षाओं को पास करने के बाद महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्राप्त की। अखाड़े की परंपरा के अनुसार, उनके बाल प्रतीकात्मक रूप से काटे गए, पंचामृत से पट्टाभिषेक किया गया और चादर भेंट की गई। इस दौरान उनकी आंखों में आंसू देखे गए, जिससे उनके आध्यात्मिक समर्पण की झलक मिलती है।

महामंडलेश्वर बनने पर विवाद

ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनने के तुरंत बाद संत समाज में तीव्र विरोध शुरू हो गया।

1. जगद्गुरु हिमांगी सखी का विरोध:

हिमांगी सखी ने कहा कि ममता कुलकर्णी के डी-कंपनी से संबंध रहे हैं और वे ड्रग केस में जेल भी जा चुकी हैं। ऐसे व्यक्ति को महामंडलेश्वर बनाना गलत है। उन्होंने इस पर जांच की मांग की।

2. बाबा रामदेव और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान:

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि संत या महामंडलेश्वर बनने के लिए वर्षों की तपस्या और साधना की आवश्यकता होती है, इसे एक दिन में प्राप्त नहीं किया जा सकता। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी इस पर आपत्ति जताई और कहा कि कोई बाहरी व्यक्ति अचानक संत नहीं बन सकता।

3. ऋषि अजय दास का आरोप:

किंन्नर अखाड़े के संस्थापक होने का दावा करने वाले ऋषि अजय दास ने कहा कि ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने की प्रक्रिया सही नहीं थी। उन्होंने लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे किन्नर समाज के उत्थान के लिए नहीं बल्कि निजी स्वार्थ के लिए कार्य कर रही हैं।

इस्तीफा और पुनः महामंडलेश्वर बनने की घोषणा

10 फरवरी 2024 को ममता कुलकर्णी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने महामंडलेश्वर पद छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़े में आपसी झगड़े हो रहे हैं और वे इससे दुखी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा साध्वी थीं और रहेंगी।

लेकिन, 12 फरवरी 2024 को उन्होंने एक और वीडियो जारी कर कहा कि उनके गुरु लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया, इसलिए वे पुनः महामंडलेश्वर के पद पर विराजमान हो रही हैं। उन्होंने कहा कि वे अपना जीवन किन्नर अखाड़े और सनातन धर्म के लिए समर्पित करेंगी।

क्या ममता कुलकर्णी ने पैसे देकर महामंडलेश्वर पद लिया?

कई लोगों ने आरोप लगाया कि ममता कुलकर्णी ने पैसे देकर महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त की है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि उनसे दो लाख रुपये मांगे गए थे, जो उन्होंने नहीं दिए। लेकिन, महामंडलेश्वर जय अंबा गिरी ने अपनी जेब से दो लाख रुपये देकर यह राशि अदा की थी। चार करोड़ या दस करोड़ देने की बात को उन्होंने पूरी तरह से गलत बताया।

ममता कुलकर्णी की आध्यात्मिक यात्रा और विवाद

ममता कुलकर्णी का जन्म 20 अप्रैल 1972 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 1991 में तमिल फिल्म ‘ननबरगल’ से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में हिंदी फिल्मों में काम किया। ‘आशिक आवारा’, ‘करण अर्जुन’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया।

लेकिन, 1993 में स्टारडस्ट मैगजीन के लिए टॉपलेस फोटोशूट कराने के कारण वे विवादों में आ गईं। इसके बाद, ‘चाइना गेट’ फिल्म में राजकुमार संतोषी के साथ विवाद हुआ और उन्होंने निर्देशक पर यौन शोषण का आरोप भी लगाया।

बॉलीवुड छोड़ने के बाद, वे आध्यात्मिक जीवन में चली गईं और दावा किया कि उन्होंने 25 वर्षों तक कठोर तपस्या की है। 2013 में उन्होंने ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगिनी’ नामक पुस्तक भी लिखी थी।

किन्नर अखाड़ा और ममता कुलकर्णी

किन्नर अखाड़ा की स्थापना 2015 में आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने की थी। इसका उद्देश्य किन्नर समाज को सनातन धर्म से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाना था। लेकिन, कई संत इस अखाड़े को मान्यता देने के पक्ष में नहीं थे।

ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर यह भी सवाल उठे कि वे स्वयं किन्नर नहीं हैं, फिर उन्हें किन्नर अखाड़े में क्यों शामिल किया गया? इस पर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि यदि ममता इस्लाम धर्म अपना लेतीं, तो धर्म के तथाकथित ठेकेदार क्या करते? सनातन धर्म से लोगों को जोड़ने के लिए यह कदम उठाया गया है।

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