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होली पर ग्रह-नक्षत्र का असर, बदल गई तारीख! जानिए कब मनाएं रंगोत्सव

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देशभर में होली का इंतजार सिर्फ रंगों के लिए ही नहीं, बल्कि खुशियों और उत्साह से भरे माहौल के लिए भी किया जाता है। हर गली-मोहल्ले में इस पर्व की अलग ही रौनक देखने को मिलती है। हालांकि इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों में काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आखिर रंगों की होली 3 मार्च को मनाई जाएगी या 4 मार्च को। पंचांग गणना, ग्रह-नक्षत्र और चंद्रग्रहण के प्रभाव के कारण यह असमंजस पैदा हुआ है। अब शास्त्रीय गणना के अनुसार स्थिति स्पष्ट हो चुकी है।

कब है होली और कब होगा होलिका दहन

पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5:32 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 4:46 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि के साथ भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा के मुख काल में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है, जबकि भद्रा के पुच्छ काल में यह शुभ होता है। इसलिए इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच किया जाएगा।

वहीं 3 मार्च को चंद्रग्रहण का योग बनने के कारण सूतक काल प्रभावी रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसी कारण रंगों का त्योहार 3 मार्च को नहीं, बल्कि 4 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग तथा धृति योग का विशेष प्रभाव रहेगा, जिसे शुभ माना गया है।

24 फरवरी से शुरू हो चुके हैं होलाष्टक

होलिका दहन से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

क्यों मनाई जाती है होली

होली का त्योहार सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक असुर राजा स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और पिता के आदेश के बावजूद उसने विष्णु भक्ति नहीं छोड़ी।

हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार वह बच गया। अंततः उसने अपनी बहन होलिका की सहायता ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है, जो अहंकार और बुराई के अंत का प्रतीक है। इसके अगले दिन रंगों से होली खेलकर लोग प्रेम, भाईचारे और खुशियों का संदेश देते हैं।

तारीख को लेकर चल रही चर्चा के बीच अब स्थिति साफ हो गई है कि इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि में किया जाएगा, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। यह पर्व एक बार फिर समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश लेकर आएगा।

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