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गौरैया की प्रजाति को बचाने के लिए समाज आगे आए : सैनी

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फतेहपुर। विश्व गौरैया दिवस पर वन परिसर में गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें गौरैया के संरक्षण एवं विलुप्त होती प्रजाति पर चिंता जाहिर की गई। गौरैया को बचाने के लिए उपस्थित लोगों को शपथ भी दिलाई गई।
रविवार को शहर स्थित वन विभाग कार्यालय परिसर में क्षेत्रीय वन अधिकारी आरएल सैनी की अध्यक्षता में विश्व गौरैया दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें देश में तेज़ी से समाप्त होती गौरैया की प्रजाति पर चिंता जाहिर करते हुए उनके संरक्षण पर चर्चा की गई। इस दौरान क्षेत्रीय वन अधिकारी आरएल सैनी ने बताया कि घरेलू गौरैया है। इसका वैज्ञानिक नाम पासेर डोमेस्टिक है। जिसकी लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर तक होती है और वजन 25 से 40 ग्राम तक होता है। इसके पंख 21 सेंटीमीटर तक होते है। दुनिया भर में गौरैया की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं। जिसमें से पांच प्रजाति भारत में पाई जाती है। विश्व गौरैया दिवस को मनाने का श्रेय नेचर फॉरेवर सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद दिलावर को जाता है। उनके ही प्रयासों की वजह से पहली बार साल 2010 में 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया गया था। छोटे गांव कस्बों में अब भी आपको गौरैया दिख जाएगी लेकिन गौरैया अब विलुप्त होने के कगार पर है। आधुनिक बनावट वाले शहरों में जहां पेड़ों की संख्या न के बराबर है, गौरैया को वहां अब घोंसला बनाने की जगह नहीं मिल पाती है जिसके कारण गौरैया की सम्पूर्ण प्रजाति पर जीवन संकट गहरा रहा है। इस दौरान लोगो को गौरैया के संरक्षण की शपथ दिलाई गई। इस मौके पर पर वन दरोगा रामराज, अभिनव सिंह समेत अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।

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