आजमगढ़ पब्लिक स्कूल में सर सैयद दिवस अखिल भारतीय मुशायरा 2025 का भव्य आयोजन
आजमगढ़ जिले के रानी की सराय के कोतिला में स्थित ….आजमगढ़ पब्लिक स्कूल में….. “सर सैयद दिवस पर ….अखिल भारतीय मुशायरा 2025” …बड़े उत्साह और साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ…… यह कार्यक्रम महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद ख़ान की जयंती और उनके शिक्षा-मिशन को समर्पित था…..
बता दें कि यह कार्यक्रम बेहद सफल रहा ….वहीँ स्कूल के प्रबंधक सी.ए. मोहम्मद नोमान ने ……बच्चों और आम लोगों को सर सैयद अहमद ख़ान के जीवन…. उनके शिक्षण योगदान और समाज सुधार के संदेशों से अवगत कराया….. उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं…..बल्कि शिक्षा और समाज सुधार की दिशा में एक प्रेरक प्रयास है……1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद मुसलमानों की स्थिति अत्यंत कठिन थी……लेकिन सर सैयद ने अपने परिवार की सुख …सुविधा छोड़कर….. पूरे समुदाय के लिए शिक्षा और तालीम का मार्ग प्रशस्त किया….. उन्होंने मदरसों और बाद में मोहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटेड कॉलेज की स्थापना की….जो आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का रूप लिया….
प्रबंधक सी.ए. मोहम्मद नोमान ने आगे कहा कि ….हमारे स्कूल का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं है….बल्कि बच्चों में भाषा, संस्कृति और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना भी है….. उन्होंने बताया कि स्कूल में सर सैयद के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए ….नीट की मुफ्त कोचिंग…..और मुबारकपुर में भी नए कैंपस की स्थापना जैसी पहल भी की जा रही हैं….
वही दूसरी पाली में मुशायरे का आयोजन हुआ , जिसमे देशभर के जाने-माने शायरों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया….. इसमें हिमांशी बाबरा, प्रो. सरफ़राज़ नवाज़, बिलाल सहारनपुरी, मयकश आज़मी, शादाब आज़मी और नदीम फ़र्रुख़ शामिल थे। वहीँ स्कूली छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर कार्यक्रम को और भी जीवंत बनाया…. मंच संचालन का कार्य नदीम फ़र्रुख़ ने बड़ी खूबसूरती से किया, और बीच-बीच में शायरों ने शिक्षा और समाज सुधार पर आधारित प्रेरक संदेश साझा किए…..
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों में डॉ. ग़ियास असद ख़ान, डॉ. शाहाबुद्दीन, डॉ. शफ़ीउज़्ज़माँ, अब्दुल्ला अलाउद्दीन और अख़लाक़ अहमद शामिल रहे। आरिफ नसीम ने शायरों का स्वागत किया और उनके योगदान को सराहा।
वहीँ अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. मोहम्मद ताहिर (विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, शिबली नेशनल कॉलेज, आजमगढ़) ने कहा,“उर्दू हमारी तहज़ीब, अदब और इंसानियत की भाषा है। सर सैयद की सोच आज भी हमें ज्ञान, एकता और तरक्क़ी की राह दिखाती है।”
कार्यक्रम के अंत में सी.ए. मोहम्मद नोमान ने सभी अतिथियों, शायरों और कर्मचारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि सर सैयद की शिक्षाएँ आज भी मार्गदर्शक हैं। उनका संदेश यह है कि ज्ञान, शिक्षा और एकता ही समाज और राष्ट्र की सच्ची नींव हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों को प्रेरित किया बल्कि समाज में शिक्षा और संस्कृति के महत्व को उजागर करते हुए सर सैयद के आदर्शों से सीख लेने का अवसर प्रदान किया।
