आजमगढ़ में सियासी संग्राम: सपा-भाजपा आमने-सामने, भ्रष्टाचार से लेकर परिवारवाद तक आरोप-प्रत्यारोप की जंग
2027 के विधानसभा चुनाव भले ही दूर हों, लेकिन राजनीतिक बिसात पर वार-पलटवार का दौर अभी से शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी आज़मगढ़ (भाजपा) के पूर्व जिलाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जय नाथ सिंह ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोलते हुए परिवारवाद और भ्रष्टाचार को पार्टी की पहचान करार दिया। वहीं, सपा ने भी पलटवार करते हुए भाजपा सरकार पर “भ्रष्टाचार के पहाड़” खड़े करने और जनता को गुमराह करने का आरोप जड़ दिया।
जय नाथ सिंह ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि सपा के 10 विधायक, 2 सांसद और 2 विधान परिषद सदस्य मिलकर लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का घोटाला कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जनता के लिए आई निधियां नेताओं की जेब में चली गईं, जबकि सदर विधानसभा क्षेत्र, जहां दुर्गा प्रसाद यादव नौ बार विधायक रहे, आज भी विकास से कोसों दूर है। उन्होंने यह भी कहा कि सपा का पूरा ढांचा परिवारवाद पर आधारित है—आजमगढ़ की सीट पर बार-बार मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और धर्मेंद्र यादव जैसे एक ही परिवार के सदस्य चुनाव लड़ते रहे, जबकि आम कार्यकर्ताओं को मौका नहीं दिया गया।
बीजेपी नेता ने मौजूदा योगी सरकार की कानून व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि अपराध लगभग शून्य है और भ्रष्ट अधिकारियों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। उन्होंने दावा किया कि आजमगढ़ सहित पूरे प्रदेश में सुरक्षा और शांति का माहौल है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सपा को 2027 के सपनों में उलझने के बजाय जनता से चोरी हुए पैसों का हिसाब देना चाहिए।
सपा नेताओं ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेता सिर्फ भ्रामक आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना चाहते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बेहतर होता कि जिस भ्रष्टाचार की बात भाजपा कर रही है, उस पर अपनी ही सरकार से जांच कराकर रिपोर्ट जनता के सामने रखते। तब उनकी बात की वैधता होती।”
सपा ने याद दिलाया कि भाजपा नेताओं ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, लेकिन मोदी सरकार की संस्था RITES की जांच में यह एक्सप्रेसवे गुणवत्ता मानकों से भी बेहतर निकला। उन्होंने कहा कि योगी सरकार को साढ़े आठ साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक एक भी भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं कर पाए।
सपा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर भ्रष्टाचार की बात आजमगढ़ से शुरू की जाए, तो खुद भाजपा की पोल खुल जाएगी। पुलिस भर्ती में फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर जिला अस्पताल में अवैध वसूली के आरोप भाजपा जिलाध्यक्ष ने खुद एफिडेविट देकर लगाए थे। सवाल यह है कि उस पर क्या कार्रवाई हुई?
इसके अलावा, बाराबंकी में एबीवीपी कार्यकर्ताओं को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने पर पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। एबीवीपी का आरोप था कि रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में बिना मान्यता लॉ के छात्रों का दाखिला किया जा रहा था और भाजपा सरकार के बड़े अफसर इस घोटाले को संरक्षण दे रहे हैं।
सपा ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला साबित होने जा रहा है—प्रदेश में चार-चार पानी की टंकियां भरभराकर गिर चुकी हैं। उनका दावा है कि योगी सरकार जब सत्ता से जाएगी, तब भ्रष्टाचार की एक-एक परत उजागर होगी।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश की जनता ने करारा झटका दिया। अब सपा का कहना है कि 2027 में विधानसभा चुनाव में भी जनता भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। वहीं भाजपा का विश्वास है कि कानून व्यवस्था और विकास कार्यों के दम पर जनता 2027 में भी योगी सरकार को दोबारा मौका देगी।
आजमगढ़ की इस सियासी जंग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और भी गर्म होने वाली है। परिवारवाद बनाम सुशासन, घोटालों के आरोप बनाम विकास के दावे—2027 की राह अब आरोप-प्रत्यारोप के इसी रणभूमि से होकर गुजरेगी।
