धर्मनगरी वृंदावन में साधु-संतों के बीच जगतगुरु रामभद्राचार्य और संत प्रेमानंद महाराज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हाल ही में जगतगुरु रामभद्राचार्य द्वारा दिए गए बयान ने संत समाज को आक्रोशित कर दिया है। उन्होंने कहा था कि संत प्रेमानंद महाराज संत नहीं हैं और उन्हें संस्कृत का एक भी श्लोक नहीं आता। इस टिप्पणी के बाद वृंदावन के साधु-संतों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे निंदनीय करार दिया है।
साधु-संतों की बैठक, माफी की मांग
वृंदावन परिक्रमा मार्ग स्थित एक गेस्ट हाउस में संतों की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में साधु-संतों ने एक स्वर में कहा कि रामभद्राचार्य का बयान सनातन परंपरा का अपमान है और वे तुरंत संत प्रेमानंद महाराज से माफी मांगें। संतों ने साफ कहा कि जब तक माफी नहीं मिलेगी, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
संतों का कहना था कि संत प्रेमानंद महाराज ने हमेशा समाज को मोह-माया से दूर रहकर धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलाया है। उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों को जोड़ने का कार्य किया है, ऐसे संत के खिलाफ अपमानजनक शब्द कहना अनुचित है।
‘ज्ञान का अहंकार ठीक नहीं’
संतों ने आरोप लगाया कि रामभद्राचार्य पर ‘ज्ञान का अहंकार’ हावी है। संत दिनेश शर्मा ने कहा, “रामभद्राचार्य जगतगुरु हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और बनारस जैसे तीर्थस्थलों पर एक से बढ़कर एक विद्वान बैठे हैं। उन्हें अपने भतीजे को उत्तराधिकारी बनाने की जगह किसी योग्य संत को उत्तराधिकारी बनाना चाहिए था। प्रेमानंद महाराज की आलोचना करना शोभा नहीं देता।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाया जा रहा है तो मंच तैयार किया जाए। संत प्रेमानंद महाराज सहित अन्य संत वहां पहुंचेंगे और सबको अपने संस्कृत ज्ञान का परिचय देंगे।
‘लोकप्रियता बर्दाश्त नहीं कर पा रहे रामभद्राचार्य’
आचार्य रासबिहारी महाराज ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संत प्रेमानंद महाराज की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी भक्ति से प्रेरित प्रवचन ही जगतगुरु को खटक रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचनों से समाज की बुराइयों को समाप्त करने और प्रेम की भावना जगाने का कार्य कर रहे हैं। जबकि जगतगुरु अपना ही गुणगान करने में व्यस्त रहते हैं।”
समाज में संदेश
साधु-संतों का कहना है कि इस विवाद से सनातन धर्म की एकजुटता को आघात पहुंचा है। उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से अपील की कि वे अपने शब्दों को वापस लें और संत प्रेमानंद महाराज से क्षमा मांगकर संत समाज में एकता का संदेश दें।
बैठक में यह भी कहा गया कि किसी भी संत को अपने ज्ञान या विद्वता का अहंकार नहीं होना चाहिए। संतों ने दोहराया कि सनातन धर्म का आधार विनम्रता, प्रेम और भक्ति है।
वृंदावन के साधु-संतों की नाराजगी से यह साफ है कि विवाद अभी थमने वाला नहीं है। संत समाज का कहना है कि यदि जगतगुरु ने माफी नहीं मांगी, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब देखना होगा कि इस विवाद को लेकर जगतगुरु रामभद्राचार्य की अगली प्रतिक्रिया क्या होती है।
