रिपोर्ट – राहुल मौर्या , आज़मगढ़

आजमगढ़ :- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की छठी तिथि पर आजमगढ़ जिले के सिधारी क्षेत्र स्थित श्री महावीर मंदिर सेवा समिति द्वारा एक भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया, मंदिर में दर्शन-पूजन किया और पूरे वातावरण को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। आयोजन की शुरुआत विशेष पूजा-अर्चना और श्रीकृष्ण की आरती से हुई। पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी झालरों, फूल-मालाओं और लाइटिंग से सजाया गया था। भक्ति संगीत और कृष्ण भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए पूड़ी, आलू की सब्जी, चावल, पापड़ और मीठी बूंदी का स्वादिष्ट प्रसाद तैयार किया गया था। भंडारे की व्यवस्था को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए कई पंक्तियों में प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी, ताकि कोई भी श्रद्धालु असुविधा महसूस न करे। स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों ने पूरी तत्परता और सेवा-भाव से जिम्मेदारियां निभाईं और पूरे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष ने बताया कि यह भंडारा हर वर्ष जन्माष्टमी के छठे दिन आयोजित किया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि “यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समाज में सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने का एक प्रयास है।”
श्रद्धालुओं में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पूरे श्रद्धा-भाव से प्रसाद ग्रहण किया और मंदिर में दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भी आयोजन की व्यवस्था, सेवा-भाव और भक्ति-भावना की प्रशंसा करते हुए इसे एक यादगार धार्मिक अनुभव बताया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि भंडारे के लिए सभी सामग्री और सेवाएं स्थानीय सहयोग और दान से एकत्र की जाती हैं, जिससे समाज की सहभागिता भी सुनिश्चित होती है। समिति ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी भक्ति और समर्पण के साथ आयोजन करते रहने का संकल्प लिया।
इस तरह सिधारी स्थित श्री महावीर मंदिर में जन्माष्टमी पर आयोजित यह भव्य भंडारा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सेवा, सहयोग और समरसता की मिसाल भी प्रस्तुत की। आयोजन ने यह साबित किया कि जब श्रद्धा और सेवा का संगम होता है, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार स्वतः ही हो जाता है।
