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आजमगढ़ में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया

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रिपोर्ट – राहुल मौर्या , आज़मगढ़ 

आज़मगढ़। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष भी आज़मगढ़ में पूरे हर्षोल्लास और भक्ति भाव से मनाया गया। जिले के सिधारी स्थित श्री महावीर मंदिर सेवा समिति द्वारा आयोजित भव्य समारोह में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूरा मंदिर परिसर रोशनी, फूलों और झूमरों से सजा हुआ था, मानो पूरा वातावरण श्रीकृष्ण भक्ति में डूब गया हो।

मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक आकर्षक सजावट की गई थी। रंग-बिरंगी झालरों, दीपकों और फूलमालाओं से सजे मंदिर में प्रवेश करते ही हर कोई स्वयं को एक अलौकिक वातावरण में अनुभव कर रहा था। सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही थी श्रीकृष्ण भगवान की बालरूप झांकी, जिसके दर्शन के लिए भक्तगण लंबी कतारों में खड़े नजर आए।

शाम के समय कार्यक्रम की शुरुआत भजन मंडली द्वारा श्रीकृष्ण भजनों के गायन से हुई। भक्त लगातार “जय श्रीकृष्ण” और “हरे रामा-हरे कृष्णा” के उद्घोष से वातावरण को गूंजायमान करते रहे। चारों ओर भक्ति रस और उल्लास की अनोखी छटा बिखरी हुई थी।

रात 12 बजे जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का पावन क्षण आया, मंदिर परिसर घंटियों की गूंज और शंखनाद से भर उठा। गर्भगृह में विशेष पूजन हुआ और भगवान श्रीकृष्ण के प्रतीक स्वरूप पालना झुलाया गया। श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से पालना हिलाकर आशीर्वाद लिया और अपनी मनोकामनाएं मांगीं। इस दौरान माहौल भावविभोर और भक्तिमय हो उठा।

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी जन्माष्टमी बड़े धूमधाम और सुव्यवस्थित ढंग से मनाई गई। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतज़ाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रही और सभी भक्तों के लिए प्रसाद वितरण की भी उत्तम व्यवस्था की गई थी।

सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजन का विशेष आकर्षण रहे। छोटे-छोटे बच्चों ने राधा-कृष्ण की लीलाओं का मंचन किया, वहीं नृत्य-नाटिकाओं ने सभी का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।

इस भव्य आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों और धर्मों के लोग सम्मिलित हुए। कार्यक्रम ने सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। लोगों ने इसे केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भक्ति, प्रेम और सत्य की भावना को मजबूत करने का अवसर बताया।

अंत में समिति के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि जन्माष्टमी जैसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और हमें यह संदेश देते हैं कि जीवन में सत्य और धर्म की राह पर चलना ही वास्तविक भक्ति है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह पर्व न केवल भक्तों की आस्था को गहरा कर गया बल्कि जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक एकता की अनोखी मिसाल भी पेश कर गया।

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