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आज़मगढ़ के इस स्कूल में दुबई से आई बच्चियों ने जीता दिल …

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“जब दिल में अपनापन और आँखों में सपनों की चमक हो…… तो सरहदें सिर्फ नक्शे पर रह जाती हैं….आजमगढ़ के एक छोटे से स्कूल में, दुबई से आईं दो बच्चियों ने अपने मासूमियत और प्यार से बच्चों के दिल जीत लिए।”

आजमगढ़ के तकिया स्थित नुरुल फलाह इंग्लिश मीडियम इस्लामिक स्कूल एवं माहेनूर नर्सरी में बुधवार का दिन बेहद खास था। नर्सरी से लेकर पाँचवीं तक के छोटे-छोटे बच्चों के लिए यह एक ऐसा मौका था, जो उनके लिए लंबे समय तक यादगार बनने वाला था।
इस खास दिन की सबसे बड़ी मेहमान थीं – नायिशा सिद्दीकी, जो बचपन से ही दुबई में रहती हैं, लेकिन उनका दिल हमेशा अपने नानी के शहर और स्कूल से जुड़ा रहा है। नायिशा ने स्कूल पहुँचते ही बच्चों को गले लगाया, उनके साथ बातें कीं और फिर ढेर सारी खुशियाँ बाँटी – टॉफी, चॉकलेट, पेन, कॉपी, फ्रूटी और प्रतियोगिताओं के विजेताओं के लिए विशेष गिफ्ट।

नायिशा के चेहरे पर एक अलग ही अपनापन था। वह बार-बार कह रही थीं, “यह स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं है, यह मेरे बचपन की कहानियों का हिस्सा है। मैं चाहती हूँ कि यहाँ के बच्चे भी बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करें।” उनकी मुस्कान और आत्मीयता ने बच्चों के मन में यह भरोसा जगा दिया कि कोई उन्हें दूर से भी देखता और सराहता है।

उनके साथ आईं उनकी बहन निमरा ने दुबई और भारत के स्कूलों के बीच के अंतर पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “यहाँ के बच्चों में गज़ब का पोटेंशियल है, बस इन्हें सही दिशा देने की ज़रूरत है। मुझे यहाँ आकर बहुत अच्छा लगा।”

कार्यक्रम में 15 मिनट का ड्रॉइंग प्रतियोगिता हुआ, जिसमें बच्चों ने अपनी कल्पना को रंगों में पिरोया। पाँच बच्चों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर इनाम जीते। वहीं, सिंगिंग प्रतियोगिता में एक नन्हीं बच्ची ने “मछली जल की रानी है” गाकर सबका मन मोह लिया, और दर्शकों की तालियाँ देर तक गूंजती रहीं।
वहीँ आज़मगढ़ महिला उत्थान सेवा संस्थान की प्रेसिडेंट ज़रीना खातून ने बच्चों की सफलता के लिए दुआ की और कहा, “मैं चाहती हूँ कि बच्चे आगे बढ़ें, इसलिए ऐसे कार्यक्रम करवाती रहती हूँ।”

दिन का अंत बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और दिलों में उम्मीद के साथ हुआ। नायिशा ने जाते-जाते कहा, “मैं फिर आऊँगी, और चाहती हूँ कि तब तक तुम सब अपने सपनों के और करीब पहुँच जाओ।”
यह सिर्फ एक स्कूल का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह संदेश था – “दूरी चाहे जितनी हो, अपनेपन का रिश्ता कभी फीका नहीं पड़ता।”

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