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मकबरा कांड पर सदन में भड़के माता प्रसाद पांडेय , मचा भयंकर बवाल …!

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फतेहपुर मकबरा तोड़फोड़ मामला विधानसभा में गूंजा, नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

लखनऊ :- उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को फतेहपुर में स्थित एक ऐतिहासिक मकबरे में हुई तोड़फोड़ का मामला गूंज उठा। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए सरकार पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया।

पांडेय ने सदन में कहा कि यह कोई एकाकी घटना नहीं है, बल्कि अब एक “परिपाटी” बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि फतेहपुर के इस मकबरे पर कब्जा करने की घोषणा सात दिन पहले ही एक पार्टी के नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई थी। इस संबंध में उन्होंने गृह सचिव से भी बातचीत की थी, जिन्होंने स्वीकार किया कि ऐलान संगठित तरीके से किया गया था।

“मकबरे को हिंदुओं का बताते हुए कब्जे की घोषणा”
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, संबंधित नेता ने दावा किया था कि यह मकबरा हिंदुओं का है और बड़ी संख्या में लोगों के साथ वहां पहुंचकर कब्जा करने का इरादा जाहिर किया था। पांडेय ने कहा कि पुलिस ने बैरिकेडिंग जरूर की, लेकिन उतनी संख्या में बल तैनात नहीं किया गया, जितनी आवश्यकता थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के दिन भीड़ पुलिस से धक्कामुक्की कर अंदर घुसी और मकबरे में तोड़फोड़ की। “यह सीधे-सीधे सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की साजिश है,” पांडेय ने कहा।

“सरकार शांति नहीं चाहती”
पांडेय ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर आरोप लगाया कि वह प्रदेश में शांति और भाईचारा बनाए रखने में नाकाम है और जानबूझकर ऐसे मामलों को हवा दे रही है। “ये एक परिपाटी चल रही है – मुस्लिम मदरसों और मकबरों को निशाना बनाओ, ताकि सांप्रदायिक माहौल खराब हो और एक पक्षीय राजनीति चल सके,” उन्होंने कहा।

सरकार की ओर से जवाब
हालांकि, सदन में मौजूद मंत्रीगण ने इस मामले पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि किसी भी घटना को सांप्रदायिक रंग न दिया जाए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

स्थानीय स्तर पर तनाव
घटना के बाद फतेहपुर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और इलाके में शांति बनाए रखने की अपील की है। स्थानीय लोगों के बीच भय और नाराजगी का माहौल है, जबकि सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को रोकने के लिए प्रशासन को अधिक सतर्क और सक्रिय होना होगा, ताकि ऐसे मामलों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए न किया जा सके।

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