नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा पार्टी के मुख्य सचेतक व सांसद धर्मेन्द्र यादव के नेतृत्व में सोमवार को सपा के सभी सांसदों ने S.I.R. के विरोध में चुनाव आयोग की ओर पैदल मार्च निकाला। यह मार्च संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में केंद्र की भाजपा सरकार के निर्देश पर पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम और बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया।
बताया गया कि रोकने के बावजूद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद धर्मेन्द्र यादव बैरिकेडिंग के ऊपर से कूदकर आगे बढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें और अन्य सांसदों को गिरफ्तार कर संसद मार्ग थाने ले जाया। गिरफ्तारी के बाद सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश देखा गया।
सपा नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार S.I.R. के माध्यम से गैर-भाजपाई वोटरों का वोट डालने का अधिकार छीनना चाहती है। उनका कहना है कि यह कदम लोकतंत्र को खत्म कर देश में हिटलरशाही लागू करने की साजिश है। सपा नेताओं का मानना है कि PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की बढ़ती ताकत से भाजपा की सत्ता हिल चुकी है और घबराहट में भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित कर रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि जब तक S.I.R. को वापस नहीं लिया जाएगा, सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लोकतंत्र की मूल भावना पर हमला कर रही है और विपक्षी दलों को दबाने के लिए पुलिस-प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है।
गिरफ्तारी की खबर मिलते ही सपा कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पार्टी कार्यालयों में आपात बैठकें बुलाई गईं और आंदोलन को तेज करने की रणनीति बनाई गई। कार्यकर्ताओं ने ऐलान किया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर वे S.I.R. के खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान चलाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि S.I.R. पर विपक्ष का यह आक्रामक रुख आगामी चुनावी माहौल को और गरमा सकता है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि S.I.R. पारदर्शिता और निष्पक्ष मतदान की दिशा में एक आवश्यक कदम है और विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह कर रहा है।
हालांकि, फिलहाल राजधानी में सपा के इस मार्च और गिरफ्तारी की घटना ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में सपा बनाम भाजपा का टकराव और तेज होने की संभावना है।
