Breaking News

A फॉर अखिलेश, D फॉर डिंपल , बच्चों को पढ़ाने पर सपा नेता पर FIR, अखिलेश बोले- अंग्रेजों ने भी नहीं की थी ऐसी कार्रवाई

Spread the love

उत्तर प्रदेश में शिक्षा और राजनीति की सरहदों को लेकर नया विवाद सामने आया है। सहारनपुर, कानपुर और भदोही में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं द्वारा चलाई गई ‘पीडीए पाठशाला’ (PDA Pathshala) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सहारनपुर में एक सपा नेता फरहाद गाडा पर आरोप है कि उन्होंने बच्चों को ‘राजनीतिक वर्णमाला’ पढ़ाई, जिसमें ‘ए’ फॉर अखिलेश, ‘डी’ फॉर डिंपल और ‘एम’ फॉर मुलायम सिखाया गया।

भावनाएं आहत, एफआईआर दर्ज
रामपुर मनिहारन क्षेत्र निवासी मेम सिंह की शिकायत पर देहात कोतवाली में फरहाद गाडा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद दर्ज किया गया जिसमें बच्चे स्कूल की यूनिफॉर्म में पीडीए पाठशाला में ‘राजनीतिक वर्णमाला’ पढ़ते दिखे।

सपा नेता का पक्ष
फरहाद गाडा ने अपने बचाव में कहा कि पाठशाला का उद्देश्य बच्चों को समाजवादी विचारधारा और महापुरुषों से परिचित कराना था। उन्होंने बताया कि ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक वर्गों की जागरूकता के लिए यह प्रयास किया गया था और उनका मकसद शिक्षा को समावेशी बनाना था।

अखिलेश यादव का हमला
एफआईआर पर सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “पढ़ाई के लिए तो अंग्रेजों ने भी एफआईआर नहीं की थी। बीजेपी का शिक्षा-विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। निंदनीय।”

कानपुर और भदोही में भी केस
सिर्फ सहारनपुर ही नहीं, कानपुर और भदोही में भी ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है। कानपुर के शाहमपुर गढ़ी गांव में सपा नेता रचना सिंह गौतम पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी स्कूल के बाहर बिना अनुमति के पीडीए पाठशाला चलाई। अधिकारियों का कहना है कि यह शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act) और आईटी अधिनियम का उल्लंघन है।

वहीं, भदोही में एक दर्जन लोगों पर स्कूल विलय योजना का विरोध करते हुए स्कूली बच्चों को राजनीतिक नारे सिखाने और सपा के पीडीए एजेंडे से जोड़ने का आरोप लगाया गया है।

राजनीति और शिक्षा के टकराव पर बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में शिक्षा के राजनीतिकरण को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर विपक्षी दल इसे सामाजिक न्याय और शिक्षा का सवाल बता रहे हैं, वहीं सरकार इसे नियमों का उल्लंघन और बच्चों के मानसिक विकास में हस्तक्षेप बता रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा विधानसभा और सड़कों दोनों पर गरमा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial