उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक इंटर कॉलेज में कक्षा 6 की मासूम छात्रा के साथ उसी स्कूल के चपरासी ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया है। यह सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब पीड़िता के परिजनों को उसके गर्भवती होने के लक्षण दिखाई दिए। न्याय की आस में अब पीड़ित परिवार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाने पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार, पीड़िता उसी इंटर कॉलेज में पढ़ती है, जहाँ उसकी माँ दाई का काम करती हैं। कभी-कभी माँ की अनुपस्थिति में मासूम बेटी उनकी जगह स्कूल में काम करने चली जाती थी। आरोप है कि इसी दौरान विद्यालय में तैनात चपरासी दसयी बिन्द ने बच्ची की नासमझी और मासूमियत का फायदा उठाया। बहला-फुसलाकर उसने कथित तौर पर बच्ची के साथ दुष्कर्म किया।
घटना के बाद, आरोपी चपरासी ने कथित तौर पर बच्ची को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, यदि उसने यह बात किसी को बताई। इस धमकी के डर से, मासूम बच्ची ने अपने परिवार में किसी को भी इस जघन्य कृत्य के बारे में नहीं बताया। समय बीतता गया और जब बच्ची में गर्भवती होने के लक्षण दिखने लगे, तब जाकर इस भयावह सच्चाई का खुलासा हुआ।
पीड़िता की माँ के अनुसार, बेटी के गर्भवती होने की जानकारी मिलते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सदमे और पीड़ा में डूबे परिवार ने तत्काल बरदह थाने का रुख किया और 11 जुलाई 2017 को लिखित शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि बरदह थानाध्यक्ष ने इस गंभीर मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार लगातार थाने के चक्कर काटता रहा, लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।
थाने में सुनवाई न होने के बाद, पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी। आज वे सब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कार्यालय पहुंचे और उनसे न्याय की गुहार लगाई। परिजनों का दावा है कि उनके पास एक वीडियो भी है, जिसमें आरोपी चपरासी ने कथित तौर पर अपना जुर्म कबूल किया है। यह वीडियो अब पुलिस के उच्चाधिकारियों की जांच का विषय है।
यह बेहद गंभीर सवाल उठाता है कि सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद, आखिर क्यों पीड़ित परिवार को थाने से मायूसी मिल रही है? एक मासूम बच्ची के साथ हुई इस हैवानियत और उसके बाद पुलिस की कथित निष्क्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता बच्ची ने अपने बयान में जो बताया है, उसे सुनकर किसी का भी कलेजा काँप जाएगा। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिल पाता है।
