मुस्लिम रिलीफ कमेटी आज़मगढ़: मानवता की सेवा में समर्पण की मिसाल
रिपोर्ट – CIB इंडिया न्यूज़
आज़मगढ़।
जब समाज में बेसहारा, गरीब और जरूरतमंदों की आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है, तब मुस्लिम रिलीफ कमेटी, आज़मगढ़ जैसी संस्थाएं इंसानियत की ख़िदमत में उम्मीद की किरण बनकर सामने आती हैं। यह संस्था वर्षों से मानवता की सेवा में जुटी हुई है और जरूरतमंदों के लिए सहारा बनी हुई है।
कमेटी द्वारा संचालित मुफ्त दवाखाना इसकी सबसे प्रभावशाली पहल है। गरीबों और लाचारों को केवल 10 रुपये के रजिस्ट्रेशन पर मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। पहले यह दवाखाना तकिया मोहल्ले की तीसरी मंजिल पर था, जहाँ बुजुर्गों को परेशानी होती थी, लेकिन अब इसे रजा कॉम्प्लेक्स, तकिया मोहल्ला चकला, यूनियन बैंक के पास वाली गली के भूतल पर शिफ्ट कर दिया गया है। आज इसका भव्य उद्घाटन मुख्य अतिथि अशफ़ाक अहमद द्वारा फीता काटकर किया गया। यहां पर डॉ. हाफिज नसीम खान की सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी।
मुस्लिम रिलीफ कमेटी न सिर्फ दवा, बल्कि ताबूत-कफ़न की व्यवस्था, लावारिस लाशों की तदफ़ीन, सिलाई-कढ़ाई और कंप्यूटर कोर्स जैसी निःशुल्क ट्रेनिंग, राशन वितरण, रक्तदान कैंप, गरीब कैदियों की रिहाई, और शादियों में सहायता जैसे कार्यों में भी सक्रिय है।
त्योहारों पर जेलों में भी सेवा जारी रहती है। ईद व बकरीद के मौके पर कैदियों को सेवईं, इफ्तार और नमाज़ की व्यवस्था की जाती है, ताकि वे भी त्योहारी खुशी से वंचित न रहें। सदर अस्पताल में इलाज, गैर-सूदी कर्ज़ और कंबल वितरण जैसी सेवाएं भी संस्था के समर्पण को दर्शाती हैं।
मिर्ज़ा अनवरुल्लाह बेग, अनीस अहमद, उबैद अहमद, परवेज आलम, महताब खान, इस्लाम कुरैशी, फ़राज़ अहमद और डॉ. अर्फ़ीन साहब जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं की बदौलत यह संस्था समाज के लिए आशा की मिसाल बन चुकी है।
मुस्लिम रिलीफ कमेटी आज़मगढ़ वास्तव में मानवता की सेवा का प्रतीक है — एक ऐसा नाम जो चुपचाप बदलाव ला रहा है, नफरतों के दौर में मोहब्बत की मिसाल बनकर।
