आजमगढ़। रमा हॉस्पिटल में एक मरीज की मौत को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में अस्पताल के डॉक्टर अमित सिंह ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
डॉ. अमित सिंह ने बताया कि मृतक भूवल चौहान नामक मरीज को 16 जून 2025 को उनके अस्पताल में भर्ती किया गया था। मरीज की पित्त की थैली में पथरी थी, साथ ही वह पहले से ही हार्ट फेलियर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था। मरीज का ऑपरेशन 17 जून को सफलतापूर्वक किया गया, जिसके बाद उसकी निगरानी आईसीयू में की गई। उन्होंने कहा कि ICU में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका समुचित इलाज किया गया।
डॉ. सिंह ने बताया कि मरीज की हालत स्थिर होने पर उसे 21 जून को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। discharge के समय मरीज स्वयं चलने की स्थिति में था और किसी प्रकार की चिकित्सकीय आपात स्थिति नहीं थी।
उनके अनुसार, डिस्चार्ज के बाद मरीज कभी दोबारा अस्पताल में नहीं आया। बताया गया कि मरीज को अन्य निजी अस्पतालों में दिखाया गया और जब उसकी तबीयत अधिक बिगड़ गई, तो परिजनों ने उसे बनारस के एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहाँ इलाज के दौरान 28 जून को उसकी मृत्यु हो गई।
डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि मौत बनारस में होने के बावजूद मृतक के परिजन शव को रमा हॉस्पिटल लेकर आए और अस्पताल के बाहर भारी संख्या में जुटकर जबरन हंगामा शुरू कर दिया। जब स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया, तो पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही। परिजन पहले पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
डॉ. सिंह ने पूरे मामले को “पूर्व नियोजित राजनीतिक साजिश” करार देते हुए कहा कि यह अस्पताल की छवि धूमिल करने का प्रयास है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
