रिपोर्ट – जुनैद खान, बहराइच
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग की सुजौली रेंज स्थित अयोध्यापुरवा गांव में शनिवार देर रात एक तेंदुए ने छत पर सो रही महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। महिला ने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।
घटना रात करीब 2 बजे की है। 38 वर्षीय जरीना, अपनी 17 वर्षीय बेटी नगमा के साथ घर की छत पर सो रही थीं, जबकि पति जाकिर और छोटी बेटी नगीना कमरे में थे। उसी दौरान एक तेंदुआ छत पर चढ़ आया। जरीना की नींद आहट से खुली, तो देखा कि तेंदुआ उनकी बेटी नगमा की ओर बढ़ रहा है। बिना कुछ सोचे जरीना ने तेंदुए का रास्ता रोका और शोर मचाकर उसे भगाने की कोशिश की।
तेंदुआ महिला पर टूट पड़ा। उसने जरीना की गर्दन अपने जबड़ों में दबोच ली और उसे छत से नीचे कूदकर गन्ने के खेत की ओर ले गया। रास्ते में तेंदुए ने महिला का चेहरा, सीना और गला बुरी तरह नोच डाला। नगमा ने बताया कि वह मां को बचाने के लिए उनका हाथ पकड़कर खींचती रही, लेकिन तेंदुआ बहुत ताकतवर था। उसके सामने वह असहाय हो गई। “मेरे सामने मेरी मां मर गई,” नगमा ने रोते हुए कहा।
महिला की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग जाग गए। हनीफ, कल्लू, अनवर, बाबू समेत कई ग्रामीण लाठी-डंडों और टॉर्च लेकर खेत की ओर दौड़े। कुछ दूरी पर उन्हें महिला का क्षत-विक्षत शव मिला, जबकि तेंदुआ भाग गया था।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जब शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने की कोशिश की गई, तो परिजनों ने विरोध किया और हंगामा करने लगे। काफी समझाने-बुझाने और आर्थिक मदद का आश्वासन देने के बाद परिजन राजी हुए। तत्काल राहत के तौर पर वन विभाग ने 5,000 रुपये की सहायता दी।
गौरतलब है कि यह गांव पहले भी तेंदुए के हमलों का शिकार रहा है। पिछले दो वर्षों में इसी परिवार के दो बच्चों – शीबू (8) और आइसा (5) की मौत तेंदुए के हमले में हो चुकी है। आठ महीने पहले सायबा नामक एक बच्ची को तेंदुए ने घायल कर दिया था। दो महीने पहले थारू पुरवा और मोहकम पुरवा गांव से भी तेंदुए को पकड़ा गया था।
घटना के बाद वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) और WWF की टीम गांव पहुंची। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और रात के समय छत पर न सोने की अपील की। WTI के को-ऑर्डिनेटर संजय सिंह ने बताया कि गांव में तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जा रहा है।
गांव के निवासी लगातार सोलर लाइट की मांग कर रहे हैं, ताकि रात में रोशनी हो और तेंदुए को अंधेरे का फायदा न मिले। प्रशासन से गुहार है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए जाएं, ताकि ग्रामीणों को चैन की नींद मिल सके।
