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गरीबों के मसीहा बने शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली – इलाज, शादी और शिक्षा के लिए दी ₹2,69,970 की मदद

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गरीबों के मसीहा बने शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली – इलाज, शादी और शिक्षा के लिए दी ₹2,69,970 की मदद
आजमगढ़: जहां सियासत अक्सर वादों में उलझकर रह जाती है, वहीं समाजवादी पार्टी के नेता व विधान परिषद सदस्य (MLC) शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली एक ऐसे चेहरे बनकर उभरे हैं, जिन्होंने सेवा को केवल भाषणों में नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर उतारा है। 17 मई से 22 मई 2025 तक के भीतर उन्होंने अपने आज़मगढ़ स्थित आवास से क्षेत्र के गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की मदद करते हुए ₹2,69,970 की आर्थिक सहायता चेक के माध्यम से दी।

इस मदद में गरीब बच्चियों की शिक्षा, बीमारों का इलाज, और शादी के खर्च शामिल हैं। शाह आलम ने कहा –
“मैंने जब राजनीति में कदम रखा था, तब ये तय किया था कि मेरी राजनीति का मकसद सिर्फ और सिर्फ जनसेवा होगा। मैं न किसी धर्म को देखता हूं, न जाति को – मेरी नज़र में हर ज़रूरतमंद इंसान एक जैसा है।”
उनकी इस आर्थिक सहायता की सूची में ऐसे कई नाम हैं, जिनकी आँखों में अब उम्मीद की रौशनी है:
दो गरीब बच्चियों की स्कूल फीस के लिए ₹71,970 की मदद दी गई।
इंदा देवी, प्रभुनाथ भगवत, जमालुद्दीन, नेसार, रायसुन्निशा, और हफजुर्रहमान जैसे असहाय लोगों को ₹10,000-₹25,000 तक की राशि उनके इलाज व अन्य ज़रूरतों के लिए दी गई।

सफ़रीन बनो को ₹25,000 की विशेष सहायता दी गई, जिनकी बेटी की शादी थी और घर में फूटी कौड़ी नहीं थी।
चंद्रशेखर बेहना, गोबरी बननापुर, शिवशंकर चकिया, किशन चंद, तरन्नुम बनो, हिना, सरस्वती, रज़िया, ताज मोहम्मद, सलीम, शमशाद, शामौतार, अस्लम मंगरावां जैसे दर्जनों लोगों को ₹5,000 से ₹15,000 तक की मदद सीधे उनके हाथों में पहुंचाई गई।

इस मौके पर शाह आलम ने भावुक होकर कहा –
“अल्लाह का शुक्र है कि उसने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं किसी के आंसू पोंछ सकूं। ये चेक नहीं, ये लोगों का हक है, और जब तक मेरी सांसें चलेंगी, मैं इसे निभाता रहूंगा।”

आज जब राजनीति में संवेदनाओं का सूखा पड़ा है, ऐसे में गुड्डू जमाली की यह पहल किसी संजीवनी से कम नहीं। वे कहते हैं –
“लोगों ने मुझे जो प्यार और भरोसा दिया है, वो मैं कभी नहीं भूल सकता। मेरा हर कदम इस क्षेत्र के ग़रीबों के लिए समर्पित है। मैं चाहता हूं कि मेरे ज़रिये कोई बच्ची स्कूल न छोड़े, कोई मां इलाज के बिना न तड़पे, कोई बेटी बिना दहेज के घर से विदा हो जाए।”
आजमगढ़ के सरायमीर, मुबारकपुर, मऊ और अन्य गांवों से आए इन गरीबों के चेहरों पर अब मुस्कान लौट आई है। और इसका श्रेय जाता है उस नेता को, जिसने राजनीति को सेवा का नाम दिया — शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली, जिन्हें आज लोग प्यार से “गरीबों का रहनुमा” कहने लगे हैं।

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