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आईआईडी निदेशक शुऐब बलवान ने विद्यार्थियों को आत्मविकास का महत्व समझाया

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आज़मगढ़:  शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि यह आत्म-चिंतन, लक्ष्य निर्धारण और नैतिक मूल्यों के साथ जीवन को दिशा देने की प्रक्रिया है। इसी उद्देश्य को लेकर कोटिला चेकपोस्ट स्थित आज़मगढ़ पब्लिक स्कूल में एक विशेष प्रेरणादायक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें आईआईडी (इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट), जम्मू-कश्मीर के निदेशक श्री मुहम्मद शुऐब बलवान ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।

इस प्रेरक सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्म-जागरूकता, जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर प्रेरित करना था। विद्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण एवं स्कूल प्रशासन की सक्रिय उपस्थिति रही।

सत्र की शुरुआत और स्वागत समारोह

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की उपप्रधानाचार्या  रूना खान द्वारा स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने श्री बलवान का विद्यालय में हार्दिक स्वागत किया और कहा कि “हमारे छात्रों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि उन्हें आज एक ऐसे व्यक्तित्व से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है जिन्होंने न केवल प्रशासनिक क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है, बल्कि युवाओं को प्रेरित करने का भी जिम्मा उठाया है।”

श्री बलवान का प्रेरणादायक संबोधन

अपने प्रभावशाली वक्तव्य में श्री शुऐब बलवान ने कहा, “अगर हम खुद को पहचान लें, अपनी क्षमताओं को समझ लें और एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें, तो जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। आत्म-जागरूकता ही आत्म-विकास की पहली सीढ़ी है।”

उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए छात्रों को बताया कि कठिनाइयाँ हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन उन्हें पार करने का साहस और दृष्टिकोण ही व्यक्ति को सफल बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और समय प्रबंधन को अपनाने की सलाह दी।

बलवान ने छात्रों से संवादात्मक तरीके से बात की, जिससे छात्र खुलकर अपने सवाल पूछ सके। उन्होंने प्रत्येक प्रश्न का उत्तर व्यावहारिक उदाहरणों के साथ दिया, जिससे छात्रों को गहरी समझ प्राप्त हुई।

छात्रों में दिखा उत्साह और आत्म-विश्वास

इस संवादात्मक सत्र के दौरान छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। उन्होंने न केवल ध्यानपूर्वक श्री बलवान के विचारों को सुना, बल्कि अपने जीवन से जुड़े प्रश्न भी पूछे, जैसे कि लक्ष्य निर्धारण में आने वाली बाधाएँ, सोशल मीडिया की लत और परीक्षा के तनाव को कैसे नियंत्रित करें।

श्री बलवान ने इन सभी प्रश्नों का उत्तर सहजता और अनुभव के साथ दिया। उन्होंने छात्रों को कहा,
“तुम्हारा आज का प्रयास ही तुम्हारा कल बनाएगा। सपनों को सच करना है तो आज से शुरुआत करो, आलस्य छोड़ो और समय का सदुपयोग करो।”

विद्यालय प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के शिक्षक मोहम्मद नोमान  एवं रूपल पंड्या ने  बलवान को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्हें पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सत्र न केवल छात्रों के दृष्टिकोण को बदलते हैं बल्कि उनमें आत्म-विश्वास और उद्देश्य की भावना भी जाग्रत करते हैं।

विद्यालय प्रशासन ने यह घोषणा की कि भविष्य में भी इस तरह के प्रेरणादायक सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि छात्रों को जीवन के व्यावहारिक पक्षों की बेहतर समझ मिल सके और वे समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

 मुहम्मद शुऐब बलवान का यह प्रेरणादायक सत्र न केवल छात्रों के लिए बल्कि शिक्षकों के लिए भी एक सीख का माध्यम बना। उनके विचारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा का असली उद्देश्य व्यक्ति को भीतर से जाग्रत करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति देना है। छात्रों ने इस सत्र से मिली ऊर्जा और प्रेरणा को अपने जीवन में अपनाने की प्रतिबद्धता दिखाई, जो इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता कही जा सकती है।

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