देश की राजनीति में एक बार फिर जातिगत जनगणना का मुद्दा केंद्र में आ गया है। 2025 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना में केंद्र सरकार ने पहली बार जातिगत आंकड़ों को शामिल करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद जहां सरकार इसे ऐतिहासिक और समावेशी बता रही है, वहीं विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि दोनों पार्टियां अब ओबीसी हितैषी बनने की ‘राजनीतिक होड़’ में लगी हैं, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है।
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने जातिगत जनगणना को लेकर बीजेपी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि काफी लंबे समय तक जातीय जनगणना से इनकार करने के बाद अब जब केंद्र सरकार ने इसे करने का निर्णय लिया है, तब दोनों ही प्रमुख दल इसका श्रेय लेने की कोशिश में लग गए हैं। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक अवसरवादिता है और बहुजन समाज इसे अच्छी तरह समझता है।
मायावती ने अपने बयान में कहा, “जातिगत जनगणना के फैसले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में होड़ मची है कि कौन खुद को बड़ा ओबीसी हितैषी दिखा सके, लेकिन अगर उनकी नीयत साफ होती तो ओबीसी समाज आज भी वंचित, शोषित और पिछड़ा नहीं होता।”
उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान के मिशन को यदि इन दलों ने गंभीरता से अपनाया होता, तो आज ओबीसी समाज देश की मुख्यधारा में पूरी तरह शामिल हो चुका होता।
सरकार का फैसला:
बुधवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि 2025 की जनगणना में जातिगत आंकड़े भी इकट्ठा किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक कुछ राज्यों द्वारा कराए गए जातिगत सर्वेक्षण पारदर्शी नहीं रहे, इसलिए अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा। केंद्र का दावा है कि इससे नीति-निर्धारण और सामाजिक कल्याण योजनाओं में बेहतर समावेशन सुनिश्चित होगा।
मायावती की प्रतिक्रिया:
इस फैसले के बाद मायावती ने स्वागत तो किया लेकिन यह भी जोड़ा कि यह फैसला बहुत देर से लिया गया है। उन्होंने कहा, “बीएसपी इस मांग को काफी समय से उठाती रही है। अब जब फैसला आया है तो हम चाहते हैं कि इसे समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए ताकि ‘जनगणना से जनकल्याण’ की भावना सफल हो सके।”
