लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों में तेजी ला दी है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी को एक बड़ा सियासी समर्थन मिला है। सुहेलदेव सम्मान स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र राजभर ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।
सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महेंद्र राजभर का पार्टी में स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने इसे ‘बड़ा दिन’ बताते हुए कहा कि अब आगामी चुनाव में सपा की जीत सुनिश्चित है। अखिलेश यादव ने कहा, “हम चाहते हैं कि समाज के सभी वर्गों को उनका हक और आरक्षण मिले। महेंद्र राजभर और उनके साथियों का सपा में आना पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ को और मजबूत करेगा।”
अखिलेश यादव ने कहा कि 2027 के चुनाव में राजभर समाज का पूर्ण समर्थन सपा को मिलेगा। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगर उनकी सरकार बनी तो लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट पर महाराजा सुहेलदेव की भव्य प्रतिमा लगाई जाएगी, जिसका हथियार अष्टधातु से निर्मित होगा।
राजभर समुदाय की बात करें तो यूपी की जनसंख्या में इनकी हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है। खासकर पूर्वांचल के 18 जिलों में इनका प्रभाव मजबूत है। कई जिलों में राजभर वोटरों की हिस्सेदारी 10 से 20 प्रतिशत तक पहुंचती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी (सुभासपा) ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिससे सपा को पूर्वांचल में बड़ा फायदा मिला था।
इस बार महेंद्र राजभर के आने से सपा को एक बार फिर पूर्वांचल में राजभर वोट बैंक को साधने की उम्मीद है।
इस मौके पर अखिलेश यादव ने अलीगढ़ में रामजी लाल सुमन के काफिले पर हुए टायर फेंकने की घटना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग बुलडोजर का टायर खोलकर ले गए, उन्हें हाउस अरेस्ट किया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेंद्र राजभर का सपा में आना पूर्वांचल की सियासत को नया मोड़ दे सकता है और यह गठजोड़ भाजपा के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
