उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चत्तुरपुर मधई पट्टी गांव में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे गांव को चौंका कर रख दिया। एक विवाहित महिला ने अपने पुराने प्रेमी को अपने ससुराल बुला लिया, और जब ससुर और परिवार के अन्य सदस्य खेत से लौटे तो दोनों को संदिग्ध हालत में रंगेहाथ पकड़ लिया गया।
यह मामला धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गया और देखते ही देखते भीड़ इकट्ठा हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए ससुर ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद गांव में पंचायत बैठाई गई। लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि स्थिति को तनावपूर्ण होने से पहले ही पुलिस और ग्रामीणों की सूझबूझ से ऐसा निर्णय लिया गया, जिससे न केवल विवाद शांत हुआ बल्कि सामाजिक मर्यादाओं को भी ध्यान में रखा गया।
10 साल पुराना प्रेम, 6 महीने पुरानी शादी
घटना की मुख्य किरदार मंजू नामक महिला है, जिसकी शादी महज छह महीने पहले ही चत्तुरपुर मधई पट्टी गांव के युवक अमित कुमार से हुई थी। मंजू मूलतः अंबेडकर नगर जिले के प्रतापपुर कला गांव की रहने वाली है। पुलिस पूछताछ में मंजू ने खुलासा किया कि उसका अपने गांव के ही युवक संजय निषाद से पिछले दस वर्षों से प्रेम संबंध था।
शादी के बाद वह संजय से दूर हो गई थी, लेकिन मन से वह कभी अलग नहीं हो पाई। हाल ही में मंजू अपने ससुराल लौटी थी क्योंकि उसके पति अमित के चाचा का देहांत हो गया था। ऐसे में ससुराल में एक समय ऐसा आया जब घर के सभी लोग खेत में गेहूं की कटाई के लिए गए हुए थे। इसी सुनसान माहौल का फायदा उठाकर मंजू ने अपने पुराने प्रेमी संजय को बुला लिया।
संदिग्ध अवस्था में रंगेहाथ पकड़े गए
दोपहर के समय जब खेत से वापस लौटे ससुर चंद्रिका प्रसाद और अन्य परिजनों ने घर में कुछ अजीब हरकतें महसूस कीं। जब उन्होंने भीतर जाकर देखा तो दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया गया। एक पल के लिए पूरा माहौल अशांत हो गया, लेकिन चंद्रिका प्रसाद ने किसी भी प्रकार की हिंसा या मारपीट से परहेज़ करते हुए मामले की सूचना गांव के अन्य लोगों और पुलिस को दी।
गांव में मचा हड़कंप, बुलाई गई पंचायत
घटना की जानकारी मिलते ही गांव में चर्चा का विषय बन गई। ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन माहौल बिगड़ने से पहले ही पुलिस ने मोर्चा संभाला। अतरौलिया थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को हिरासत में लिया।
इसके बाद गांव के बुजुर्गों, प्रधान और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पंचायत बुलाई गई। कई घंटों तक विचार-विमर्श और पूछताछ चली। मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा होने के कारण पंचायत ने निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों की बातें सुनीं।
मंदिर में हुई शादी, सामाजिक विवाद से बचा गांव
अंततः यह तय किया गया कि यदि दोनों प्रेमी सच में एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और साथ रहना चाहते हैं, तो उनकी शादी करा दी जाए। इससे न सिर्फ सामाजिक विवाद खत्म होगा, बल्कि भविष्य में कोई कानूनी पेंच भी नहीं रहेगा।
शाम होते-होते गांव के सम्मो माता मंदिर में पूरे रीति-रिवाज के साथ दोनों की शादी कराई गई। इस अवसर पर गांव के कई लोग, पंचायत सदस्य, पुलिसकर्मी और परिवार के कुछ सदस्य भी मौजूद रहे।
पिता ने तोड़ा रिश्ता, ससुर ने दिखाई सहनशीलता
इस विवाह से मंजू के पिता शिवपाल निषाद बेहद नाराज़ हुए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “अब हमारा और हमारी बेटी का कोई रिश्ता नहीं रहा। उसने हमारे भरोसे को तोड़ा है।”
वहीं मंजू के ससुर चंद्रिका प्रसाद ने बड़ा दिल दिखाते हुए कहा, “जो हुआ वो गलत था, लेकिन हमने समाज और परिवार की शांति के लिए यही सही समझा।”
प्रेमी युगल ने जताई संतुष्टि
मंजू और संजय, जो अब पति-पत्नी बन चुके हैं, ने भी इस निर्णय पर संतोष जताया। उनका कहना है कि अब वे समाज के सामने खुलकर एक साथ जीवन बिता सकेंगे। संजय ने कहा, “हमने एक-दूसरे से सच्चा प्रेम किया है। अब जब हम एक हो गए हैं, तो यही हमारी जीत है।”
मंजू ने भी कहा, “मैं जानती हूं कि जो किया वो समाज की नजरों में गलत था, लेकिन हमने एक-दूसरे से कभी झूठ नहीं बोला। आज हम एक साथ हैं, यही सबसे बड़ी बात है।”
ग्रामीणों ने सराहा पुलिस की भूमिका
गांववालों ने भी पुलिस की भूमिका की तारीफ की। कई ग्रामीणों ने कहा कि यदि पुलिस समय पर नहीं पहुंचती और शांति से स्थिति को नहीं संभालती, तो मामला हिंसक हो सकता था।
इस घटना ने जहां एक ओर समाज के पुराने रीति-रिवाजों को चुनौती दी, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाया कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर सूझबूझ से काम लें, तो किसी भी मुश्किल परिस्थिति का हल निकाला जा सकता है।
