गैंगस्टर के घर दावत में पहुंचे अखिलेश यादव, BJP पर बोला तीखा हमला – सवालों में घिरी सपा की ‘सुचिता’ की राजनीति
आजमगढ़/लखनऊ:
एक पुराना फिल्मी गीत है – “देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान…” ये पंक्तियाँ जब भी सुनाई देती हैं, हर दौर में किसी न किसी घटनाक्रम पर सटीक बैठ जाती हैं। अब जरा हाल की इस घटना पर गौर करें – समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, जो कभी माफियाओं और अपराधियों से दूरी बनाए रखने के लिए जाने जाते थे, आज उन्हीं के घरों में मेहमान बनते नजर आ रहे हैं।
मंगलवार को अखिलेश यादव आजमगढ़ जिले के गंभीरपुर क्षेत्र में हाजी अब्दुल कलाम के बेटे मोहम्मद सादिक के निकाह के उपलक्ष्य में आयोजित दावत-ए-वलीमा में शरीक हुए। लेकिन ये सामान्य राजनीतिक या सामाजिक उपस्थिति नहीं मानी जा सकती, क्योंकि जिस घर में ये दावत थी, उसी घर के दो बेटे — मोहम्मद राशिद और मोहम्मद फहद — पर गैंगस्टर एक्ट के तहत गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। और यहीं से इस दौरे की राजनीति शुरू होती है।
राजनीतिक सुचिता पर उठे सवाल
सवाल यह है कि क्या सत्ता की भूख इतनी बढ़ गई है कि अब राजनेता अपराधियों के दरवाजे पर जाकर सियासी रोटियां सेंकने से भी परहेज़ नहीं कर रहे?
यही अखिलेश यादव थे जिन्होंने कभी मंच से माफिया अतीक अहमद को धक्का देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया था। यही अखिलेश 2017 विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल यादव द्वारा सपा में मुख्तार अंसारी के परिवार को शामिल कराए जाने का विरोध कर चुके थे, भले ही उसकी कीमत उन्हें हार के रूप में चुकानी पड़ी हो।
लेकिन अब वही अखिलेश सत्ता के समीकरण साधने के लिए गैंगस्टरों से जुड़े परिवार के भोज में शरीक हो रहे हैं। इससे उनकी राजनीतिक नैतिकता और सुचिता पर सवाल उठने लगे हैं।
गैंगस्टर भाइयों का इतिहास
दावत में जिस परिवार की मेजबानी थी, उसके दो बेटे मोहम्मद राशिद और मोहम्मद फहद के खिलाफ गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड हैं।
साल 2021 में शाहबाज कमर नामक युवक ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद राशिद ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसे और उसके भाई को पीटा, उनकी कार को तोड़ा और जान से मारने की धमकी दी।
सिर्फ यही नहीं, वर्ष 2015 में मोहम्मद मुकीम नामक आरोपी को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने के लिए गंभीरपुर थाने पर करीब 100 लोगों ने हमला किया था। इस मामले में भी राशिद और फहद का नाम सामने आया था।
इन्हीं मामलों को आधार बनाकर 2022 में तत्कालीन एसपी अनुराग आर्य ने 12 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी, जिसमें राशिद और फहद भी शामिल थे।
पुलिसकर्मी भी सस्पेंड हुए
2023 में इस मामले ने और तूल पकड़ा, जब दीपावली के अवसर पर गंभीरपुर थाने के दो पुलिसकर्मी — सब-इंस्पेक्टर मदन कुमार गुप्ता और कांस्टेबल शुभम सिंह — गैंगस्टर राशिद के घर जाकर बधाई देने और फोटो खिंचवाने पहुंचे। तस्वीरें वायरल होने के बाद जांच बैठी और दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया।
BJP पर तीखा हमला, हिटलर तक की तुलना
इस दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने सिर्फ मेहमान नवाजी नहीं की, बल्कि मीडिया से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी जोरदार हमला बोला।
उन्होंने कहा, “अगर भाजपा के 400 सांसद जीत जाते, तो आगरा में जो राइफल और तलवारें लहराई गईं, वो देशभर की सड़कों पर दिखाई देतीं। हर गली में बवाल होता। यह हमें हिटलर के दौर की याद दिलाता है। हिटलर अपने समर्थकों को पुलिस की वर्दी पहनाता था, जैसे BJP की यह करणी सेना आज दिखाई देती है।”
उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्गों के हक की लड़ाई जारी रखेगी।
आजमगढ़ से सपा का पुराना रिश्ता
अखिलेश यादव का यह दौरा सिर्फ एक पारिवारिक निमंत्रण का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसमें सियासी समीकरण भी छिपे थे। आजमगढ़ को सपा का गढ़ माना जाता है। जिले की 10 विधानसभा सीटों में सपा का वर्चस्व है, वहीं दोनों लोकसभा सीटों पर भी पार्टी का कब्जा है। ऐसे में सपा प्रमुख का यहां लगातार संपर्क बनाए रखना एक चुनावी रणनीति भी मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव जानबूझकर ऐसे परिवारों से संबंध बनाए रख रहे हैं, जिनका स्थानीय प्रभाव मजबूत है, भले ही उनकी छवि विवादित क्यों न हो।
भाजपा ने साधा निशाना, सपा ने किया बचाव
भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव के इस दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने कहा कि समाजवादी पार्टी का असली चेहरा अब सामने आ गया है। अपराधियों को गले लगाकर अखिलेश ने साबित कर दिया है कि सत्ता पाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।
वहीं, सपा नेताओं ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यह एक पारिवारिक निमंत्रण था और हाजी अब्दुल कलाम पार्टी के लंबे समय से निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। पार्टी उनके पारिवारिक आयोजनों से खुद को अलग नहीं कर सकती।
निष्कर्ष: सुचिता बनाम सत्ता की जंग
अखिलेश यादव की यह आजमगढ़ यात्रा कई सवाल छोड़ गई है। क्या समाजवादी पार्टी की राजनीति अब मूल विचारों और उस ‘साफ-सुथरी राजनीति’ से भटक रही है, जिसके लिए अखिलेश को एक समय पर युवा चेहरे के रूप में पसंद किया गया था?
या फिर ये व्यावहारिक राजनीति है, जहां सत्ता तक पहुंचने के लिए सभी समीकरण साधना जरूरी हो गया है?
जो भी हो, पर जनता सब देख रही है। और आने वाले चुनावों में इसका असर सपा की छवि और जनसमर्थन पर जरूर दिखाई देगा।
(रिपोर्ट: CIB India News)
