तीन साल के बीमार बच्चे को सदर अस्पताल लाए पिता की दिखी बेबसी
फतेहपुर। तीन साल के बच्चे का सरकारी इलाज कराने सदर अस्पताल आए एक मजदूर पिता की शनिवार बेबसी देखते बनी। अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता होने के बावजूद डॉक्टर ने मेडिकल स्टोर का पर्चा थमा दिया। पर्चे में लिखी दवाओं की रकम ज्यादा होने के कारण यह बेबस पिता सिर्फ ड्राफ्ट खरीद सका।
शहर के रानी कॉलोनी निवासी दुर्गेश कुमार, बीमार बेटे उमेश (3) को लेकर सुबह 11 बजे ओपीडी के कमरा नंबर चार पहुंचे। ईएनटी सर्जन ने मरीज देखने के बाद दवाओं का पर्चा जो लिखा, उसमें लिखी दवाएं बाहर की थीं। बकौल दुर्गेश, सारी दवाएं बाहर की लिखी होना बताए जाने पर वह सदर अस्पताल के सामने स्थित एक मेडिकल स्टोर पहुंचे। वहां पर एक हफ्ते की दवाओं का मूल्य 340 रूपए बताया गया। जेब में सिर्फ 100 रूपए थे। लिहाजा इतनी रकम में अकेले 80 का ड्रॉप मिल सका। देखा जाए तो यह सिर्फ बानगी है। हकीकत यही है कि अस्पताल के दवा भंडार में हरेक तरह की दवाओं की उपलब्धता होने के बावजूद जिले के सबसे बड़े अस्पताल की ओपीडी में बाहर से दवाएं खरीद कर खाने को पर्चे लिखे जा रहे हैं जबकि कई मर्तबा इस मामले पर शोर मच चुका है। अधिकारियों ने अल्टीमेटम जारी कर रखा है। इसके बावजूद डॉक्टर और एमआर का गठजोड़ खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दवा कंपनियों के एजेंट डॉक्टर के चेंबर में बैठकर अपनी दवाइयां लिखवा रहे हैं।
