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काशी में शिव के दूल्हे रूप का अनुपम दर्शन

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वाराणसी: पौराणिक नगरी काशी में महाशिवरात्रि का पर्व इस वर्ष भव्य और ऐतिहासिक अंदाज में मनाया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साथ ही, इसी दिन भगवान शिव ने पहली बार अग्नि स्तंभ यानी शिवलिंग के रूप में प्रकट होकर अपने निराकार स्वरूप का दर्शन कराया था। इसी कारण इस दिन को शिव और शक्ति के मिलन के रूप में बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ का आलम यह था कि आधी रात से ही मंदिर के बाहर करीब 4 किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भक्तों को 9-9 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। सुबह से अब तक 4.56 लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके थे और अनुमान है कि पूरे दिन में यह संख्या 25 लाख तक पहुंच जाएगी।

भोर में मंगला आरती और भव्य श्रृंगार

तड़के 2:15 बजे बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर बाबा का दूल्हे की तरह भव्य श्रृंगार किया गया। आरती के दौरान मंदिर में हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। हालांकि, मंगला आरती के दौरान श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाए जाने से कुछ श्रद्धालुओं की पुलिसकर्मियों से हल्की नोकझोंक भी हुई।

नागा साधुओं की पेशवाई बनी आकर्षण का केंद्र

इस महाशिवरात्रि पर वाराणसी में 7 शैव अखाड़ों के 10 हजार से अधिक नागा साधु बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने पहुंचे। हाथ में गदा और त्रिशूल लिए, शरीर पर भस्म और फूल माला धारण किए नागा साधुओं की शोभायात्रा आकर्षण का केंद्र रही। ढोल-नगाड़ों के साथ निकली पेशवाई में साधुओं के साथ उनके अस्त्र-शस्त्र भी शामिल थे।

जूना अखाड़े के साधु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के नेतृत्व में मंदिर पहुंचे। नागा साधुओं के लिए विशेष बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। लाखों की संख्या में भक्त रात से ही सड़कों के किनारे खड़े होकर नागा साधुओं के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक दिखे।

महाकुंभ और महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व महाकुंभ के साथ पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया। ऐसा दुर्लभ संयोग छह वर्षों के बाद बना है। इससे पहले 2019 के कुंभ में ऐसा ही संयोग बना था, जब 15 लाख श्रद्धालु काशी पहुंचे थे। कुंभ के बाद महाशिवरात्रि के अवसर पर शैव अखाड़ों के नागा साधु बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आते हैं।

पहली बार महाशिवरात्रि का व्रत करने वालों के लिए जरूरी नियम

महाशिवरात्रि का व्रत रखने वालों के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, विशेषकर पहली बार व्रत करने वालों के लिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उपवास रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। व्रत के दौरान संयम और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

  1. सात्विक आहार: व्रत के दिन केवल फल, दूध और अन्य सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए।
  2. पूजा विधि: भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें और बेलपत्र, धतूरा तथा भस्म अर्पित करें।
  3. रात्रि जागरण: शिवरात्रि की रात जागरण कर शिवपुराण का पाठ और शिव मंत्रों का जाप करें।
  4. सकारात्मक सोच: इस दिन बुरे विचारों और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए।

पुलिस प्रशासन ने संभाला मोर्चा

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाराणसी पुलिस और प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। मंदिर मार्ग पर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। मंगला आरती के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी में उमड़ी भीड़ और भक्तों की आस्था ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह पर्व भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का अभिन्न हिस्सा है। शिव और शक्ति के इस पावन मिलन पर्व ने श्रद्धालुओं के जीवन में भक्ति, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

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