आजमगढ़: केंद्र सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के विरुद्ध लाए गए नए कानून के विरोध में आज सेंट्रल बार एसोसिएशन, आजमगढ़ मंडल के अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन मंडलायुक्त, आजमगढ़ को सौंपा, वहीं केंद्रीय विधि मंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी, आजमगढ़ को भी प्रदान किया।
इस मौके पर अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाया गया यह कानून मनमाना, निरंकुश और तानाशाही रवैए को दर्शाता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस कानून के जरिए सरकार अधिवक्ता समुदाय को नियंत्रित कर गुलाम बनाना चाहती है। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि यह कानून वादकारी और अधिवक्ता के बीच अविश्वास की खाई पैदा करेगा, जिससे अधिवक्ता स्वतंत्र रूप से अपने कार्यों का निर्वहन नहीं कर सकेंगे।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार, जो अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं रख पा रही है, अब अधिवक्ताओं पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रही है। अधिवक्ताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
नेतृत्व और उपस्थिति:
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम का नेतृत्व सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जयप्रकाश राय और मंत्री शेषमणि तिवारी एडवोकेट ने किया। कार्यक्रम में सेंट्रल बार एसोसिएशन के सभी अधिवक्ता भारी संख्या में उपस्थित रहे और एकजुटता का प्रदर्शन किया।
अधिवक्ता समुदाय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने के लिए तैयार है। अब देखना यह है कि सरकार इस ज्ञापन पर क्या प्रतिक्रिया देती है और अधिवक्ताओं की मांगों को किस प्रकार से संबोधित करती है।
