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बिजली निजीकरण किसानों और बुनकरों के लिए घातक होगा – एमएलसी शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली

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विधानपरिषद में बिजली निजीकरण और जनहित के मुद्दों पर गरमाई चर्चा

लखनऊ: शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन, 18 दिसंबर 2024 को विधानपरिषद में समाजवादी पार्टी के एमएलसी शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली ने नियम 105 के तहत किसानों, बुनकरों और प्रदेशवासियों के हित से जुड़े बिजली निजीकरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
बिजली निजीकरण पर गंभीर सवाल
गुड्डू जमाली ने सदन में बिजली निजीकरण के संभावित दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कदम किसानों और बुनकरों के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि निजीकरण के चलते बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि बुनकरों की रोज़ी-रोटी पहले से ही संकट में है, और अगर बिजली दरों में वृद्धि हुई, तो यह उनके व्यवसाय को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा, “सरकार को बिजली निजीकरण की योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि यह कदम प्रदेशवासियों, विशेष रूप से किसानों और बुनकरों के हितों के खिलाफ न हो। यह केवल मुनाफाखोरी को बढ़ावा देगा और आम आदमी के लिए संकट का कारण बनेगा।”
किसानों और बुनकरों की समस्याओं पर फोकस
जमाली ने सदन में किसानों की समस्याओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिजली के निजीकरण से सिंचाई के लिए आवश्यक बिजली महंगी हो सकती है, जिससे किसान वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसके अलावा, उन्होंने बुनकर समुदाय की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से अपील की कि वे इस क्षेत्र को बचाने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करें।
उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश का बुनकरी उद्योग हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। अगर बुनकरों को समय पर सहायता नहीं मिली, तो यह उद्योग धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। सरकार को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।”
विपक्ष का समर्थन और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
गुड्डू जमाली के इस मुद्दे को उठाने पर विपक्ष के अन्य सदस्यों ने भी उनका समर्थन किया। कई सदस्यों ने बिजली निजीकरण के संभावित खतरों पर चिंता व्यक्त की और इसे रोकने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की बात कही।
वहीं, सत्ता पक्ष ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार बिजली के निजीकरण के साथ-साथ आम जनता के हितों की भी पूरी तरह से रक्षा करेगी। उन्होंने दावा किया कि निजीकरण का उद्देश्य बिजली आपूर्ति को अधिक प्रभावी और कुशल बनाना है।
सदन में गर्म माहौल
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। जहां विपक्ष ने इसे जनता विरोधी कदम बताया, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे विकास के लिए आवश्यक सुधार बताया। सदन का माहौल इस बहस के दौरान काफी गर्म रहा।
जनता की उम्मीदें
गुड्डू जमाली और विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दे जनता के हितों से जुड़े हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन पर क्या कदम उठाती है। बिजली निजीकरण और जनहित के इन सवालों पर सरकार का अगला कदम प्रदेशवासियों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।शीतकालीन सत्र के इस तीसरे दिन की कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष बिजली निजीकरण और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए तैयार है। अब यह देखना बाकी है कि सरकार इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाती है।

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