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आज़मगढ़: व्यापारी ने रची लूट की झूठी साजिश, बहन को पैसे न लौटाने के लिए बनाया प्लान…

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आज़मगढ़: व्यापारी ने रची लूट की झूठी साजिश, बहन को पैसे न लौटाने के लिए बनाया प्लान

आज़मगढ़ जिले की पुलिस ने 24 घंटे के अन्दर एक ऐसा ख़ुलासा किया है जिसे सुनकर लोग हैरतज़दा हो गए। शहर कोतवाली क्षेत्र के गणेश मंदिर के पास बुधवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जब व्यापारी चंदन अग्रवाल ने लूट की झूठी साजिश रचने की बात कबूल की। व्यापारी ने अपनी बहन से लिए गए तीन लाख रुपये न लौटाने के लिए यह झूठी कहानी गढ़ी।

मामले की पुष्टि तब हुई जब शहर कोतवाली के इंस्पेक्टर शशि मौली पांडे ने जांच के दौरान चंदन अग्रवाल से सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में चंदन ने बताया कि उसने यह पूरा षड्यंत्र बहन को पैसे न लौटाने के लिए रचा था। चंदन अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने 3 दिसंबर को अपनी बहन से तीन लाख रुपये उधार लिए थे, जिसे शेयर बाजार में निवेश कर दिया।

शेयर बाजार में घाटा, लूट की कहानी बनी बहन को गुमराह करने का तरीका
चंदन अग्रवाल को शेयर बाजार में ट्रेडिंग की लत थी। 4 दिसंबर को किए गए इस निवेश में भारी घाटा होने के बाद उसके पास बहन को पैसे लौटाने का कोई साधन नहीं बचा। अपनी असमर्थता छिपाने और बहन को गुमराह करने के लिए उसने लूट की झूठी कहानी गढ़ी।

चंदन अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उसने तीन लाख रुपये अपने खाते में जमा कर लिए थे और लूट की झूठी सूचना पुलिस को दी। उसके इस कृत्य से पुलिस और प्रशासन को न सिर्फ परेशान होना पड़ा बल्कि जांच के दौरान कई सवाल भी उठे।

पुलिस ने किया खुलासा, साजिश की परतें उधेड़ी
शुरुआत में मामला संदिग्ध लग रहा था। जिले के एसएसपी हेमराज मीणा ने बताया कि व्यापारी द्वारा दी गई लूट की सूचना प्रथम दृष्टया से ही असामान्य लग रही थी। जांच के दौरान यह पता चला कि चंदन अग्रवाल ने लूट की सूचना देकर बहन के पैसे न लौटाने की योजना बनाई थी।

इंस्पेक्टर शशि मौली पांडे ने बताया, “चंदन अग्रवाल ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने बहन से तीन लाख रुपये लिए थे, जिसे ट्रेडिंग में लगा दिया। घाटा होने पर उन्होंने लूट की कहानी बनाकर झूठी अफवाह फैलाई।”

कानूनी कार्रवाई शुरू
एसएसपी हेमराज मीणा ने यह भी बताया कि चंदन अग्रवाल के खिलाफ झूठी सूचना देने और पुलिस प्रशासन को गुमराह करने के आरोप में विधिक कार्रवाई की जा रही है। झूठी सूचना देने के इस मामले ने लोगों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे आर्थिक दबाव और लालच लोगों को गलत कदम उठाने पर मजबूर कर सकता है।

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