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आज़मगढ़ से योगी सरकार कर रही है सौतेला व्यवहार !

 

एक तरफ देश भर में लोकसभा चुनाव की गूँज मचनी शुरू हो गयी है तो दूसरी तरफ सरकार ने आम जनता के लिए क्या किया , जनप्रतिनिधियों का कैसा काम काज रहा , जिसकी वजह से वो एक बार फिर जनता जनार्दन के बीच जायेंगे और अपने तथा पार्टी के लिए वोट मांगेंगे . वैसे जब भी देश में आम चुनाव होता है तब हमेशा सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश पर टिकी होती हैं और लोगों का ऐसा मानऩा है कि सत्ता की कुर्सी तक अगर जाना है तो यूपी से जीतकर जाना होगा . यूपी में एक बेहद ख़ास जिला है , जो पूर्वांचल के ह्रदय में बसा है , नाम है आज़मगढ़ …जब भी आज़मगढ़ का नाम आता है मुबारकपुर की रेशमी साड़ियाँ हमारे मानस में चलचित्र की तरह उभर जाती है , यहाँ की साड़ियाँ दुनियाभर में प्रसिद्द है ….यहाँ के सांसद भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ हैं… तो विधानसभा मुबारकपुर में अखिलेश यादव सपा के विधायक हैं …..यहाँ पर राजा मुबारक शाह के द्वारा बनवाई गयी शाही मस्जिद है तो मुबारकपुर की अरेबिक यूनीवर्सिटी दुनियाभर में मशहूर है , यहाँ विदेशों से भी लोग इस्लामिक शिक्षा ग्रहण करने आते हैं …

यहाँ के निवासियों के लिए मुबारकपुर से बाहर आने जाने के लिए , व्यापारियों को व्यापार के सिलसिले में मुबारकपुर आने के लिए २०१२ से लेकर २०१७ की तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने व्यपारियों और आम जन की सहूलत को देखते हुए 5 करोड़ की लागत से एक बस स्टेशन बना …जो बनकर पूरी तरह से तैयार तो है ….मुबारकपुर के आमजन के साथ साथ व्यापारियों ने भी सोचा कि अब शायद मुबारकपुर के रेशमी साड़ियों के उद्योग के भी दिन बहुरेंगे , लेकिन २०१७ में सत्ता के परिवर्तन से लेकर अबतक दो बार प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो गए , योगी सरकार लगातार सत्तासीन है , लेकिन इस बस स्टेशन को न जाने किसकी नज़र लग गयी जो आजतक ये संचालित नहीं हो सका ..

.विपक्ष के तमाम नेता योगी सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते रहे हैं …उनका ये आरोप भी काफी हद तक जायज़ भी दिखता है …क्योंकि 5 करोड़ की लागत से बना ये बस स्टेशन किसी भुतहा या शापित स्टेशन के जैसा हो गया है , जो बनकर तो तैयार है लेकिन उसको चलाया नहीं जा रहा है …जनता को सुविधा देना तो छोड़िये , ये सरासर जनता के पैसों के साथ खिलवाड़ है …खैर बीच – बीच में कई बार ऐसा समय आया कि लगा कि अब ये वाबस स्टेशन चालू हो जाएगा , लेकिन मुबारकपुर और आसपास के लोगों को हासिल हुआ तो सिर्फ इंतज़ार ….समय समय पर स्थानीय विधायक अखिलेश यादव और पूर्व विधायक गुड्डु जमाली ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया , जिसपर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी आश्वासन दिया , लेकिन नतीजा वही ..ढाक के तीन पात….

खैर एक वक़्त ऐसा भी आया , जब लगा कि जिले को एक तेज़ तर्रार सांसद मिला है , लेकिन वो सारी तेज़ी सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ के भाषणों तक ही सीमित रही …काश निरहुआ ने लफ्फाजी के अलावा इस बंद पड़े बस स्टेशन को ही सरकार से चालू करवा दिया होता तो लोग उनका धन्यवाद करते नहीं थकते …लेकिन निरहुआ तो आज़मगढ़ एअरपोर्ट से विमान ही उड़ाते रह गए , न विमान उड़ा और न ये बस स्टेशन ही शुरू हुआ . एक बार फिर से चुनावी माहौल है , यहाँ के  लोगों को लगता है कि शायद इस बार कोई चमत्कार हो , आम जनता के लिए सरकार या जनप्रतिनिधि इस बस स्टेशन को शुरू करवाएं …ताकि आज़मगढ़ का ये क्षेत्र आर्थिक तौर पर जिले , प्रदेश और देश की इकॉनमी में अपना योगदान दे सकें …

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